पहले कर्मकार बोर्ड के अध्यक्ष पद से बिना संज्ञान में लाए हटाने, एजी से जांच कराने और फिर जिम कार्बेट की जंगल सफारी को लेकर विधायक दिलीप सिंह रावत के निशाना साधने के बाद मीडिया के सामने आए वन एवं श्रम मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत बेबाक दिखे। उन्होंने यहां तक कह दिया कि मैं अभिमन्यु नहीं, जो मारा जाऊंगा। उन्होंने सभी मुद्दों पर तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखा।
पिछले कुछ महीनों से मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत लगातार विवादों में हैं। इन विवादों की शुरुआत हुई थी कर्मकार बोर्ड में हुए फेरबदल से। यहां से सचिव पद से दमयंती रावत को हटाने और अध्यक्ष पद से खुद मंत्री को हटाने की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उन्हें हटाकर नया बोर्ड बना दिया गया। बात यहीं तक रहती तो ठीक थी, लेकिन इसके बाद मामले में एजी की जांच भी बैठा दी गई।
बोर्ड के नए अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल ने तो यहां तक कह दिया कि एजी की जांच के बाद जरूरत पड़ी तो विशेष ऑडिट होगा याएसआईटी जांच कराई जाएगी। इसी से जुड़ा दूसरा मसला ईएसआईसी के अस्पताल का आया। इसमें शासन स्तर पर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, जिसमें भविष्य में विजिलेंस या अन्य कोई जांच कराने की चर्चाएं तेज हो रही हैं।
अब जिम कार्बेट पार्क में जंगल सफारी प्रोजेक्ट का शिलान्यास वन मंत्री हरक सिंह रावत ने किया तो लैंसडौन से भाजपा विधायक दिलीप सिंह रावत विरोध में उतर आए। उन्होंने कहा कि इस सफारी के बाद कंडी मार्ग का रास्ता और मुश्किल हो गया है, क्योंकि इसके नियम इतने सख्त होंगे कि कंडी मार्ग की अनुमति मिलनी आसान न होगी।
इन तमाम प्रकरणों में लगातार सवाल उठने के बाद मीडिया के सामने आए वन मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत ने सभी मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी। जब उनसे सवाल पूछा गया कि मंत्री होते हुए भी कर्मकार बोर्ड से जुड़े मसलों को उनके संज्ञान में नहीं लाया गया तो उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने कुछ लोगों ने गलत तथ्य पेश किए हैं। हालांकि उन्होंने किसी का भी नाम नहीं लिया। अंत में इतना जरूर बोले कि मैं अभिमन्यु नहीं, जो मारा जाऊंगा। उनके इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
एजी की ऑडिट टीम मेरे कार्यकाल में ही आई थी
श्रम मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि एजी की टीम कर्मकार बोर्ड का ऑडिट करने के लिए मेरे कार्यकाल में ही आई थी। लेकिन उस वक्त कोविड-19 महामारी की वजह से बोर्ड और सभी अफसर जरूरतमंदों की मदद में जुटे हुए थे। बोर्ड डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर की प्राथमिकता पर काम कर रहा था, इसलिए एजी की टीम से बाद में ऑडिट का अनुरोध किया गया था। उन्होंने साफ किया कि कहीं भी किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं है। सबकुछ नियमानुसार किया गया है।