कोविड 19 महामारी से राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा। वर्ष 2019-20 में कर राजस्व 12,188 से घटकर 11513 करोड़ रह गया। राजस्व के प्रमुख स्रोत वैट और जीएसटी, आबकारी कर व मोटर वाहन कर में कमी आई। इससे राज्य के वित्तीय व्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा। जीएसटी की प्रतिपूर्ति बंद हो जाने से यह वित्तीय स्थिति और गड़बड़ा जाएगी।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष के साथ संवाद में औद्योगिक संगठनों ने रखी मांग
औद्योगिक संघों ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े हिमालयी राज्यों को आर्थिक अवस्थापना विकास के लिए अलग 200 करोड़ का पैकेज देने की वकालत की है। इसके अलावा औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत औद्योगिक विकास सेंटर, उद्योगों को उत्पादकता के आधार पर प्रोत्साहन देने की मांग उठाई है।
शनिवार को बीजापुर गेस्ट हाउस में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने राज्य के औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ उद्योगों के विकास, समस्याओं पर संवाद किया। सीआईआई उत्तराखंड के अध्यक्ष विपुल डावर ने सुझाव दिया कि बड़े औद्योगिक निवेश के लिए राज्य में छोटे-छोटे उद्योगों का होना बहुत जरूरी है। बड़े उद्योगों को छोटे वेंडर की आवश्यकता होती है। इसके लिए इन्क्यूवेशन सेंटर स्थापित होना चाहिए। पलायन रोकने के लिए गढ़वाल और कुमाऊं में नई स्मार्ट सिटी को विकसित किया जाना चाहिए।
इंडस्ट्री एसोसिएशन आफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि उद्योगों को उत्पादकता के आधार पर प्रोत्साहन मिलना चाहिए। इससे स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी। हिमालयी राज्य अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े हैं। जिससे इन राज्यों को सीमांत क्षेत्रों में आर्थिक अवस्थापना विकास के लिए कम से कम दो-दो सौ करोड़ का पैकेज मिलना चाहिए।
वनों में खराब हो रही संपदा का मूल्य संवर्धन करने के लिए छोटे उद्योगों को इस्तेमाल करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उत्तराखंड में औद्योगिक विकास के लिए एक ऐसा एकीकृत इंडस्ट्री सेंटर होना चाहिए। जहां पर उद्योगों को सभी तरह की सुविधा मिल सके। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं का संज्ञान लेते हुए उन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। एमएसएमई के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ने और प्रदेश में जगह-जगह छोटे उद्योग स्थापित करने की जरूरत है।