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उत्तराखंड: जीएसटी मुआवजे को लेकर सरकार की पेशानी पर बल, प्रतिपूर्ति बंद हुई तो लगेगा 5000 करोड़ का झटका

Sun, 10 Oct 2021 10:53 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून

सार

मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू कहते हैं, यह चिंता केवल उत्तराखंड राज्य की ही नहीं है। कई और राज्य भी जीएसटी प्रतिपूर्ति को जारी रखने की बात केंद्र से उठा रहे हैं।
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वस्तु एवं सेवा कर - फोटो : iStock
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विस्तार
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उत्तराखंड सरकार अगले साल गंभीर वित्तीय संकट की आशंका से सहमी है। वस्तु एवं सेवाकर(जीएसटी) में राज्य को जो नुकसान की प्रतिपूर्ति मिल रही है, उसकी मियाद खत्म हो जाएगी। अनुमान है कि मुआवजे की धनराशि बंद होने से सीमित संसाधनों वाली उत्तराखंड सरकार को सालाना करीब पांच हजार करोड़ रुपये का झटका लगेगा।

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इस आशंका से राज्य सरकार की पेशानी पर बल है। इसलिए सरकार केंद्र तक अपनी चिंता को जाहिर करने के लिए हर फोरम पर आवाज उठा रही है। जीएसटी काउंसिल में मुद्दा उठाने के साथ ही मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की ओर से भी केंद्र सरकार को अनुरोध पत्र भेजे जा रहे हैं।

मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू कहते हैं, यह चिंता केवल उत्तराखंड राज्य की ही नहीं है। कई और राज्य भी जीएसटी प्रतिपूर्ति को जारी रखने की बात केंद्र से उठा रहे हैं। शनिवार को यह मसला उत्तराखंड के दौरे पर आए नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार के सामने उठा। मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव  और वित्त विभाग के उच्चाधिकारियों ने इस मसले प्रमुखता से रखा।   
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करीब 5000 करोड़ का होगा नुकसान
वित्त विभाग का अनुमान है कि जून 2022 में जीएसटी प्रतिपूर्ति बंद होती है तो उत्तराखंड सरकार को इससे करीब पांच हजार करोड़ रुपये सालाना का नुकसान होगा। वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्र ने जीएसटी में 4811 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति की थी।  सितंबर 2021-22 तक 1832 करोड़ की प्रतिपूर्ति हो चुकी है। सीमित वित्तीय संसाधनों वाले राज्य के लिए यह धनराशि बहुत बड़ी है। इसमें कमी आने से राज्य के नए विकास योजनाओं को शुरू करने में कठिनाई होगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार के सामने जीएसटी प्रतिपूर्ति को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि 2022 में जीएसटी प्रतिपूर्ति समाप्त हो रही है। इससे राज्य के लिए वित्तीय समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने आग्रह किया कि जीएसटी प्रतिपूर्ति को बरकरार रखने के लिए नीति आयोग केंद्र से पैरवी करे।

किस वर्ष कितना जीएसटी का मुआवजा मिला
वर्ष       -    प्राप्त मुआवजा राशि  -    कुल जीएसटी
2017-18  -  1283                -  7598.39 
2018-19  -  2037को             -      8722.68
2019-20  -   2477.38    -         9214.98
2020-21  -   4811.87      -       11135.97
2021-22   -  1832.53     -         5611.97
नोट: (2021-22 के सितंबर तक के आंकड़े। धनराशि करोड़ में)

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कोविड से सरकार की आय को लगा है झटका

कोविड 19 महामारी  से राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा।  वर्ष 2019-20 में कर राजस्व 12,188 से घटकर 11513 करोड़ रह गया। राजस्व के प्रमुख स्रोत वैट और जीएसटी, आबकारी कर व मोटर वाहन कर में कमी आई। इससे राज्य के वित्तीय व्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा। जीएसटी की प्रतिपूर्ति बंद हो जाने से यह वित्तीय स्थिति और गड़बड़ा जाएगी।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष के साथ संवाद में औद्योगिक संगठनों ने रखी मांग 
औद्योगिक संघों ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े हिमालयी राज्यों को आर्थिक अवस्थापना विकास के लिए अलग 200 करोड़ का पैकेज देने की वकालत की है। इसके अलावा औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत औद्योगिक विकास सेंटर, उद्योगों को उत्पादकता के आधार पर प्रोत्साहन देने की मांग उठाई है। 

शनिवार को बीजापुर गेस्ट हाउस में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने राज्य के औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ उद्योगों के विकास, समस्याओं पर संवाद किया। सीआईआई उत्तराखंड के अध्यक्ष विपुल डावर ने सुझाव दिया कि बड़े औद्योगिक निवेश के लिए राज्य में छोटे-छोटे उद्योगों का होना बहुत जरूरी है। बड़े उद्योगों को छोटे वेंडर की आवश्यकता होती है। इसके लिए इन्क्यूवेशन सेंटर स्थापित होना चाहिए। पलायन रोकने के लिए गढ़वाल और कुमाऊं में नई स्मार्ट सिटी को विकसित किया जाना चाहिए। 

इंडस्ट्री एसोसिएशन आफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि उद्योगों को उत्पादकता के आधार पर प्रोत्साहन मिलना चाहिए। इससे स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी। हिमालयी राज्य अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े हैं। जिससे इन राज्यों को सीमांत क्षेत्रों में आर्थिक अवस्थापना विकास के लिए कम से कम दो-दो सौ करोड़ का पैकेज मिलना चाहिए।

वनों में खराब हो रही संपदा का मूल्य संवर्धन करने के लिए छोटे उद्योगों को इस्तेमाल करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उत्तराखंड में औद्योगिक विकास के लिए एक ऐसा एकीकृत इंडस्ट्री सेंटर होना चाहिए। जहां पर उद्योगों को सभी तरह की सुविधा मिल सके। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं का संज्ञान लेते हुए उन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। एमएसएमई के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ने और प्रदेश में जगह-जगह छोटे उद्योग स्थापित करने की जरूरत है।
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