क्षतिपूर्ति वनीकरण की योजना कैंपा के तहत अब प्रदेश में पांच हजार महिलाओं को जंगल की आग बुझाने का जिम्मा मिलेगा। इनके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पांच हजार पुरुषों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। प्रदेश सरकार की ओर से इनको करीब सात हजार रुपये का मानदेय भी दिया जाएगा।
सोमवार को सचिवालय में वनाग्नि प्रबंधन की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने अधिकारियों को कैंपा के तहत बजट फील्ड स्तर के अधिकारियों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कैंपा योजना के तहत त्रिवेंद्र सरकार में वन मंत्री रहे हरक सिंह ने करीब दस हजार ग्रामीणों को जंगल की आग बुझाने से लेकर वन्य जीवों से फसल सुरक्षा की योजना बनाई थी।
इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने 40 करोड़ रुपये का बजट की अनुमति दे दी है। मुख्य सचिव ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव वन आनंद बर्द्धन, सचिव अमित नेगी, नीतेश झा, प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
तुरंत राहत उपलब्ध कराने का निर्देश
मुख्यमंत्री ने जंगल की आग बुझाने के दौरान मृतक कार्मिकों और स्थानीय नागरिकों के परिवारों को राहत राशि तुरंत देने का भी आदेश दिया। वन कर्मियों को जरूरी सभी उपकरण तुरंत उपलब्ध कराने को भी कहा।
ड्रोन से होगा फायर लाइन का सर्वे
मुख्यमंत्री ने कहा कि फायरलाईन की मानिटरिंग के लिए ड्रोन सर्वे कराया जाए। आपदा प्रबंधन विभाग को जंगल की आग पर काबू पाने के लिए हेलीकाप्टर की भी व्यवस्था रखने के निर्देश दिए।
वन पंचायतों को मिलेगी तवज्जो
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन पंचायतों और स्थानीय लोगों की सहभागिता बहुत जरूरी है। स्थानीय लोगों के हकहकूक का समय से वितरण किया जाए। वन, पुलिस, राजस्व व अन्य संबंधित विभागों में पूरा समन्वय हो। जिलाधिकारी नियमित रूप से समीक्षा करें।
जिलाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंस कर जानकारी ली
मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों से कहा कि जानबूझकर आग लगाने वालों को चिन्हित किया जाए। वनाग्नि के कारण जो भी क्षति होती है, उसमें आपदा के मानकों के अनुसार तत्काल राहत राशि प्रदान की जाए। पिरूल एकत्र का भुगतान समय से हो।
-36 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र में कंट्रोल बर्निंग की जाती है प्रदेश में
-2700 किमी फायर लाईनों का रखरखाव किया जाता है।
-7000 स्थानीय फायर वाचर तैनात होते हैं हर साल 40 मास्टर कंट्रोल रूम, 1317 क्रू स्टेशन और 174 वाच टावर