पर्यावरण कार्यकर्ता निरित दत्ता
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निरित ने बताया कि सिगरेट फिल्टर का पुनर्नवीनीकरण किया जाए, तो इनका उपयोग खिलौने, कुशन और इसी तरह की वस्तुओं के निर्माण के लिए किया जा सकता है। जागरूकता के अभाव में इन फिल्टरों को अन्य कचरे के साथ मिला दिया जाता है। इस अभियान का मकसद युवाओं में जागरूकता के साथ ही पर्यावरण को हो रहे नुकसान को कम करना है। यह सिगरेट फिल्टर एकत्रित करने के बाद इसे रिसाइकल के लिए भेजा जाएगा। धूम्रपान के बाद छोड़ी गई सिगरेट की बट (टोटा) कपास से बनी प्रतीत होती है, लेकिन इसमें सेल्यूलोस एसीटेट होता है। एक प्लास्टिक, जो उस मिट्टी के लिए भयानक होता है, जो जिसमें इसे डंप किया जाता है।