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बटरश अभियान: चेन स्मोकर से पर्यावरण कार्यकर्ता बने निरित, अब पर्यावरण बचाने के लिए रात को निकलते हैं सड़कों पर

Sat, 13 Nov 2021 01:59 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal रेनू सकलानी, अमर उजाला, देहरादून

सार


 
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पर्यावरण कार्यकर्ता निरित दत्ता - फोटो : अमर उजाला
हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाले जान लें कि एक सिगरेट उन्हीं के लिए नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी बेहद खतरनाक है। इस संदेश के साथ एक इंजीनियर ने देहरादून में ‘बटरश’ अभियान शुरू किया है। खुद एक चेन स्मोकर से पर्यावरण कार्यकर्ता बने निरित दत्ता के मुताबिक सिगरेट के ये टोटे (सिगरेट फिल्टर) सेहत के लिए खतरनाक होने के साथ ही पर्यावरण के लिए भी प्लास्टिक से ज्यादा खतरनाक हैं। शुक्रवार रात दो बजे से निरित और उनकी पचास युवाओँ की टीम सिगरेट के टोटे इकट्ठा करने शहर के अलग-अलग हिस्सों में उतरी। देहरादून से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले निरित दत्ता और उनकी पचास लोगों की टीम शुक्रवार रात दो बजे से देहरादून के अलग-अलग हिस्सों में सिगरेट के टोटे इकट्टा किए। लगातार 24 घंटे चलने वाले इस अभियान में युवा व युवतियां दोनों ही शामिल हैं। निरित इससे पहले कोलकाता और बेंगलुरु में यह अभियान चला चुके हैं। कोलकाता में चलाए अभियान में निरित और उनकी टीम ने 24 घंटे में 23 हजार चार सौ सिगरेट के फिल्टर एकत्रित किए थे और अब 22 नवंबर को गोवा में भी यह अभियान चलाया जाएगा।
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पर्यावरण कार्यकर्ता निरित दत्ता - फोटो : अमर उजाला
निरित ने बताया कि सिगरेट फिल्टर का पुनर्नवीनीकरण किया जाए, तो इनका उपयोग खिलौने, कुशन और इसी तरह की वस्तुओं के निर्माण के लिए किया जा सकता है। जागरूकता के अभाव में इन फिल्टरों को अन्य कचरे के साथ मिला दिया जाता है। इस अभियान का मकसद युवाओं में जागरूकता के साथ ही पर्यावरण को हो रहे नुकसान को कम करना है। यह सिगरेट फिल्टर एकत्रित करने के बाद इसे रिसाइकल के लिए भेजा जाएगा। धूम्रपान के बाद छोड़ी गई सिगरेट की बट (टोटा) कपास से बनी प्रतीत होती है, लेकिन इसमें सेल्यूलोस एसीटेट होता है। एक प्लास्टिक, जो उस मिट्टी के लिए भयानक होता है, जो जिसमें इसे डंप किया जाता है।
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पर्यावरण कार्यकर्ता निरित दत्ता - फोटो : अमर उजाला
निरित ने बताया कि सिगरेट किस चीज से बनी होती है, इस बारे में जब लोगों से पूछा गया तो महज तीन लोगों को पता था कि इसमें प्लास्टिक है। बाकी लोगों को यह बायोडिग्रेडेबल कॉटन लगा। बताया कि सिगरेट फिल्टर समुद्र तटों और महासागरों में सबसे अधिक पाए जाने वाले कचरे में से एक है। यह प्लॉस्टिक बैग की तुलना में बेहद खतरनाक है। 

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पर्यावरण कार्यकर्ता निरित दत्ता - फोटो : अमर उजाला
निरित ने बताया कि 2018 में बेंगलुरु में आईटी क्षेत्र में काम करने के बाद मैंने देखा कि लोग एक दिन में 10 से 12 सिगरेट ब्रेक लेते हैं। कॉलेज के दौरान मैंने कभी सिगरेट को हाथ नहीं लगाया, लेकिन नौकरी के दौरान मुझे मेरे साथियों के साथ यह लत लगी। शुरू में एक, फिर दो और फिर एक दिन में मैं 15 से 50 सिगरेट पीने लगा। सर्दियों में यह और भी बुरा होता था।  
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पर्यावरण कार्यकर्ता निरित दत्ता - फोटो : अमर उजाला
बतौर निरित, मुझे सिगरेट की बहुत बुरी लत गई थी। एक दिन कुछ साथियों के साथ मैं भी फुटबॉल खेलने लगा, लेकिन मेरी सांस बुरी तरह फूलने लगी। मैं खुद को बहुत थका हुआ और कमजोर महसूस करने लगा। इतनी कम उम्र में ही मेरा शरीर इतना कमजोर हो गया था। उस दिन मैंने अपने आप से वादा किया कि मैं अपने शरीर के साथ और खिलवाड़ नहीं करुंगा। इसके बाद मैंने न सिर्फ सिगरेट कम की, बल्कि ‘बटरश’ अभियान की शुरुआत भी की। निरित आज कई टॉक शो भी करते हैं।
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