एसओजी प्रभारी ऐश्वर्यपाल सिंह ने बताया कि आरोपित शहर के प्रतिष्ठित आहूजा लैब के नाम से फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनाता था। पूछताछ में उसने बताया कि वह 12 वीं का छात्र है और एक मोबाइल की दुकान में काम करता है। उसे मोबाइल की अच्छी जानकारी है। उसने मोबाइल पर पिक्स आर्ट व एडोब लाइट रूम व अन्य एप डाउनलोड किए थे।
उसने आहूजा लैब की ऑनलाइन आरटीपीसीआर रिपोर्ट निकाली। इसके बाद उसने एप के माध्यम से इस रिपोर्ट को एडिट कर अपनी फर्जी आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट निकाली। कहा कि वर्तमान में कई लोग ऐसे हैं जिन्हें निगेटिव रिपोर्ट चाहिए है। उसने ऐसे लोगों को अपनी फर्जी रिपोर्ट दिखाकर यकीन दिलाया कि वह बिना सैंपल के ही आहूजा लैब की आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव रिपोर्ट तैयार करता है। आरोपी ने बताया कि उसने कई लोगों को फर्जी रिपोर्ट दी।
प्रति रिपोर्ट की लेता था 150 रुपये
आरोपित ने बताया कि फर्जी रिपोर्ट का वह प्रति रिपोर्ट 150 रुपये लेता था। आरोपी ने बताया कि यह काम वह केवल पैंसों के लालच के लिए करता था। कहा कि कई लोगों को बाहर आने जाने के लिए फर्जी रिपोर्ट की आवश्यकता पड़ती थी। वह ऐसे ही लोगों को यह रिपोर्ट देता था। बताया कि अब तक कई लोगों को वह फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट उलब्ध करा चुका है।
कोरोना के दौरान फर्जी रिपोर्ट, उपकरणों, इंजेक्शन की कालाबाजारी पर पुलिस लगातार नगर रख रही है। हाल ही में ब्लैक फंगस बीमारी में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शनों की कालाबाजारी का खुलासा किया था। अब फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनाने का मामला पकड़ा गया है। अगर किसी को इसकी सूचना है तो वह पुलिस से संपर्क कर सकता है।
- डॉ. योगेंद्र सिंह रावत, एसएसपी देहरादून