प्रसिद्ध गर्जिया मंदिर के टीले में आईं दरारों को लेकर आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों की टीम मंदिर में पहुंची। इंजीनियरों ने मंदिर में दर्शन कर टीले का निरीक्षण किया। इस दौरान मंदिर के पुजारी व मंदिर समिति के सदस्यों से विस्तार से जानकारी ली।
आईआईटी रुड़की के सिविल इंजीनियर विभाग के अध्यक्ष डॉ. सतेंद्र मित्तल के निर्देशन में इंजीनियर दिनेश कुमार, निहारिका शुक्रवार को 12:30 बजे रामनगर पहुंचे। इसके बाद सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता कैलाश उनियाल व उनकी टीम के साथ दोपहर में एक बजे गर्जिया मंदिर पहुंचे।
टीम ने मंदिर की ऊंचाई और टीले की चौड़ाई नापी। टीले में आईं दरारों की जानकारी पुजारी मनोज पांडेय और मंदिर समिति से जुड़े गोविंद बुधानी से ली। बता दें कि मंदिर के टीले में आईं दरारों को लेकर डीएम ने आईआईटी रुड़की को पत्र लिखकर टीम को बुलाया था।
टीले के चारों ओर बनेंगी सीढ़ियां तो मिलेगा लाभ
मंदिर के पुजारी मनोज पांडेय ने इंजीनियरों की टीम से कहा कि यदि टीले के चारों ओर सीढ़ियां बनाई जाती हैं तो मंदिर में दर्शन करने वाले बुजुर्गों को इसका लाभ मिलेगा और वह मंदिर की परिक्रमा भी कर सकेंगे। इंजीनियरों की टीम ने भरोसा दिलाया कि टीले को बचाने के लिए सभी प्रयास करेंगे।
टीम ने भी माना बाबिल घास है टीले का कवच
इंजीनियर डॉ. सतेंद्र मित्तल ने जब मंदिर के टीले में बची बाबिल घास को देखा तो उन्होंने भी माना कि घास कम होने की वजह से दरारें पड़ी हैं। यदि मंदिर के टीले पर घास की मात्रा अधिक खासी होती तो शायद टीले में दरारें नहीं पड़ती। आगामी बरसात को देखते हुए इंजीनियरों की टीम कार्य कर रही है।
गर्जिया मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र : बिष्ट
रामनगर विधायक दीवान सिंह बिष्ट और भाजपा नेता मदन जोशी भी इंजीनियरों से मंदिर में मिले। विधायक ने कहा कि गर्जिया मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर आने वाले हर श्रद्धालु इस समय मंदिर की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। उन्होंने मंदिर की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।