मालगाड़ी से टकराने के बाद शिशु हाथी की मौत पर जिम्मेदार अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास नजर आ रहा है। मालगाड़ी के लोको पायलट और वन अधिकारी घटना को लेकर अलग बयानबाजी कर रहे हैं। देर रात, हरिद्वार से हर्रावाला जा रही मालगाड़ी से पांच वर्षीय शिशु नर हाथी की मौत हो गई थी। रेंज अधिकारी महेंद्र गिरि गोस्वामी के मुताबिक छह हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर रेलवे ट्रैक पार कर रहा था। हाथियों के झुंड में तीन शिशु हाथी भी शामिल थे। रेलवे ट्रैक पार करने के बाद शिशु नर हाथी दोबारा से ट्रैक की तरफ लौटने लगा। जिसके बाद शिशु हाथी मालगाड़ी से जा टकराया। जिसके बाद नर हाथी की मौके पर ही मौत हो गई।
वहीं मालगाड़ी के लोको पायलट मनोज मीणा के मुताबिक वह हॉर्न बजाते हुए मालगाड़ी को चला रहे थे। मालगाड़ी 32 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चल रही थी। उन्होंने देखा अचानक झाड़ियों से निकलकर एक शिशु हाथी रेलवे ट्रैक पर आ गया है। इसी बीच मनोज ने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए। उनके मुताबिक शिशु हाथी अकेला था। वह देर रात एक बजकर 30 मिनट से तड़के 4:10 बजे तक रेलवे ट्रैक पर ही रहे। इस बीच अन्य हाथी उन्हें नही दिखाई दिए। उधर, रेंज अधिकारी ने बताया लोको पायलट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
30 हाथियों की जान ले चुका देहरादून-हरिद्वार रेलवे ट्रैक
हरिद्वार-देहरादून रेलवे ट्रैक पर तेजी से दौड़ रही ट्रेन गजराज की जान ले रही है। वन विभाग और रेलवे की लापरवाही के कारण साल 1987 से अब तक 30 हाथी अपनी जान गंवा चुके हैं। वर्ष 1987 से 2021 तक ट्रेन से कटकर 30 हाथियों की जान जा चुकी है। वर्ष 2000 से 2001 में चार हाथियों की मौत हो गई थी। 2002 ये 2003 के बीच चार हाथियों की जान चली गई। 2009 व 2017 में दो हाथियों ने दम तोड़ा।
फरवरी 2018 में देहरादून-हरिद्वार रेलवे ट्रैक के कांसरों रेंज पर ट्रेन से कटकर एक शिशु हाथी की मौत। मार्च 2018 में ही रायवाला और मोतीचूर के पास ट्रेन से कटकर अल-अलग हादसों में दो मादा हथिनी की मौत हो गई थी। 2019 में नई दिल्ली से दून आ रही नंदा देवी एक्सप्रेस की चपेट में आने से दो नर हाथियों की मौत हो गई थी। 2019 में ट्रेन की चपेट में आने से एक शिशु हाथी व एक मादा हथिनी की मौत हो गई थी। शनिवार देर रात भी एक शिशु हाथी की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हो गई।