शासन के निर्देशों पर दायर हुई याचिका
यूपीसीएल प्रबंधन के अनुसार, इस मामले को सुलझाने के लिए बोर्ड की 126वीं बैठक में चर्चा की गई थी। इसके बाद उत्तराखंड सरकार के ऊर्जा विभाग ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत नियामक आयोग को निर्देश दिए कि वह जनहित और कंपनी की वित्तीय स्थिति को देखते हुए इस दावे का परीक्षण करे। सरकार के निर्देश के बाद ही यह औपचारिक याचिका दायर की गई है।
50 प्रतिशत महंगी हो जाएगी बिजली
कंपनी का मानना है कि इस लंबित मामले के निस्तारण से यूपीसीएल की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। हालांकि, निगम ने यह भी स्वीकार किया है कि आयोग ने इस दावे को स्वीकारा तो इससे उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाएगी। यूपीसीएल ने मूल दावा (एआरआर) 936.37 करोड़ रुपये, कैरिंग कॉस्ट 4,963.65 करोड़ रुपये मिलाकर कुल 5,900.01 करोड़ रुपये की मांग रखी है।