बर्फबारी थमने पर टीम 27 नवंबर को गंगोत्री से चलकर भोजवासा पहुंची। अगले दिन टीम ने गोमुख पहुंचकर हालात का जायजा लिया। रविवार रात को यह टीम लौट आई है। टीम के सदस्यों ने गोमुख में झील बनने की आशंका और यहां जमा मलबे से खतरे का आंकलन किया।
टीम अब शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। गंगोत्री नेशनल पार्क के वन क्षेत्राधिकारी प्रताप पंवार ने बताया कि टीम को गंगोत्री से आगे डेढ़ से ढाई फीट बर्फ से ढके ट्रैक को लांघ कर गोमुख पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
गोमुख में भी इस समय तीन फीट से ज्यादा बर्फ है। वहां पर कोई झील नहीं है। टीम में भूवैज्ञानिक सुशील खंडूड़ी, रेंजर प्रताप पंवार, आपदा प्रबंधन के मास्टर ट्रेनर चैन सिंह रावत एवं मस्तान भंडारी आदि शामिल रहे।