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उत्तराखंड : कई जिलों में थमी विकास की रफ्तार, जिला योजना के बजट की एक पाई भी जारी नहीं

Thu, 01 Jul 2021 03:51 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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चुनावी साल में विकास के इंजन को तेजी से दौड़ाने की कोशिश में जुटी प्रदेश सरकार के लिए यह चिंता की बात है कि पिछले दो महीनों में जिला योजना के बजट का कायदे से इस्तेमाल नहीं हो पाया।

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राकेश खंडूड़ी योजना का बजट आवंटन और इससे जुड़े प्रस्तावों को समय पर मंजूरी देने का दायित्व जिलाधिकारी और प्रभारी मंत्री को दिया गया है। लेकिन अधिकतर जिलों में जिला योजना के बजट खर्च की प्रगति बेहद निराश करने वाली है। हरिद्वार, अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले में वित्तीय वर्ष के पहले दो महीनों में एक पाई तक खर्च नहीं हो सकी है।

सरकार ने 500 करोड़ किए थे जारी
चुनावी साल को देखते हुए प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही जिला योजना समितियों के तहत होने वाले विकास कार्यों के लिए 500 करोड़ रुपये की किस्त जारी की थी। आशा थी कि पहली तिमाही में बजट खर्च की रफ्तार तेज रहेगी।
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दो महीने में छह फीसदी भी खर्च नहीं
वित्तीय वर्ष के पहले दो महीने अप्रैल और मई में जिला योजना के आवंटित बजट के सापेक्ष प्रदेश के सभी 13 जिलों में खर्च का प्रतिशत छह फीसदी भी नहीं है। 500 करोड़ के सापेक्ष जिलों ने 190 करोड़ 97 लाख 77 हजार रुपये की जारी किए। इसके सापेक्ष जिलों में 10 करोड़ 65 लाख 75 हजार रुपये ही विकास कार्यों पर खर्च हो पाए हैं।

प्रस्तावों पर नहीं लग सकी मुहर
अप्रैल और मई में प्रदेश के तीन जिलों में जिला योजना के एक प्रस्ताव पर भी मुहर नहीं लगी। लिहाजा शासन से समय पर बजट जारी होने के बावजूद एक पाई भी इन जिलों में आवंटित नहीं हो पाई। कुछ जिलों में शासन से मंजूर धनराशि के सापेक्ष बेहद कम धनराशि जारी हुई।

जिलों में लटका बजट
जनपद  - प्रतिशत
चमोली-05.81
पौड़ी-  03.07
हरिद्वार-00.00
अल्मोड़ा-00.00
बागेश्वर-00.00
यूएसनगर-08.90

यहां कुछ सुधार रहा
जिला -  प्रतिशत
चंपावत - 97.70
पिथौरागढ़ - 72.37
रुद्रप्रयाग- 98.90
नैनीताल-31.57
(नोट: शासन से अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष जिलों में आवंटन का प्रतिशत)

मैं नैनीताल जिले का प्रभारी हूं। मैंने वहां सभी प्रस्तावों को अनुमोदन दे दिया है। जहां तक दूसरे जिलों में जिला योजना की धनराशि के खर्च का सवाल है तो इस बारे में प्रगति रिपोर्ट मंगाई जाएगी। प्रयास रहेगा कि उपलब्ध बजट के सापेक्ष विकास योजनाओं पर तेजी से अमल हो।
- सुबोध उनियाल, शासकीय प्रवक्ता

कोविड महामारी का बहाना
जिला योजना के बजट का सही ढंग से इस्तेमाल न करने और विकास कार्यों की धीमी रफ्तार के लिए कोविड महामारी का बहाना बनाया जा रहा है। लेकिन 13 में से कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां जिला योजना के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। हालांकि शासन से अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष खर्च की गति बहुत धीमी है।

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