शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ब्रह्मपाल सिंह सैनी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए निदेशालय उत्तराखंड के कार्यालय से अटैच कर दिया गया है। आदेश के बाद सीईओ डा. आनंद भारद्वाज ने कार्यभार संभाल लिया है। वहीं ब्रह्मपाल सिंह सैनी ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि सभी आरोपों की जांच हो चुकी है। नोटिस मिला है। जिसका जवाब दिया जाएगा।
गौरतलब है कि रहमतपुर निवासी पदम कुमार ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर डीईओ बेसिक ब्रह्मपाल सिंह सैनी पर कई आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेशों का हवाला देते हुए शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने बृहस्पतिवार को डीईओ बेसिक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर शिक्षा निदेशालय के कार्यालय में अटैच करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
वहीं बताया गया है कि डीईओ बेसिक पर आरएसएस से जुड़े होने और शिक्षकों को गलत तरीके से सत्रांत लाभ दिए जाने समेत कई अन्य आरोप लगाए गए थे। डीईओ बेसिक ब्रह्मपाल सिंह सैनी ने बताया कि मामले में अपर निदेशक गढ़वाल समेत तीन सदस्यीय कमेटी जांच कर चुकी है। उन पर लगाए गए आरोप द्वेषभावना से प्रेरित हैं। उन्हें विभाग की ओर से नोटिस मिला है। जिसका जवाब दिया जाएगा।
सरकार ने हाईकोर्ट को बताया, डीईओ को कर दिया निलंबित
नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) धर्मपाल सैनी के पद के दुरुपयोग करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए एक सप्ताह बाद कि तिथि नियत की है।
पिछली तिथि को कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि अभी तक इनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, अगर नहीं की गई है तो नोटिस देकर इनके खिलाफ चार्ज फ्रेम करें। राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि था उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई है। राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को कोर्ट को बताया कि डीईओ को निलंबित कर निदेशालय में संबद्ध कर दिया गया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ एंव न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी पदम कुमार ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि डीईओ सैनी ने अपने पद का दुरुपयोग कर कई शिक्षकों को नियम विरुद्ध तरीके से लाभ दिया है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि वह नियमावली के विरुद्ध अपने गृह जनपद में कार्यरत हैं, जिसकी शिकायत उन्होंने जिला अधिकारी से की, जिसकी जांच भी हुई। जांच में उनके ऊपर लगाए गए आरोप सिद्ध हुए, लेकिन उन पर विभागीय कार्यवाही नहीं हुई।