स्मार्ट वेंडिंग जोन योजना के नाम पर पहले बड़े-बड़े सपने दिखाए गए, लेकिन साल भर अब इस महत्वाकांक्षी योजना की कवायद पर ब्रेक लगा दिया है। ऐसे में वेंडिंग जोन में ठेलियों के 20-20 हजार रुपये जमा करने वाले लोग अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। बोर्ड सीईओ तनु जैन के अनुसार अगले बोर्ड के गठन के बाद ही योजना पर विचार किया जाएगा।
पिछले साल योजना की कवायद शुरू की गई
देहरादून नगर निगम की तर्ज पर छावनी परिषद देहरादून की ओर से प्रेमनगर में स्मार्ट वेंडिंग जोन बनाने की योजना बनाई थी। इसके लिए लिए चार स्थान चिह्नित किए थे। बाकायदा इसका प्रस्ताव छावनी परिषद बैठक में पास किया गया। इसके पीछे मंशा अवैध ढंग से लगने वाली ठेलियों को तय स्थान पर ठेली लगाने का लाइसेंस देकर लगने वाले जाम से निजात दिलाना था। पिछले साल योजना की कवायद शुरू की गई।
बाकायदा वेडिंग जोन के लिए ठेलियां बनाने के लिए एक कंपनी को अधिकृत भी कर दिया गया। कंपनी की ओर से सौ से अधिक लोगों से एडवांस में ठेलियों के लिए 20-20 हजार रुपये लिए गए। इसके बाद कैंट बोर्ड की यह योजना राजनीति के फेर में फंस गई। कुछ लोग वेंडिंग जोन के लिए तय स्थान और अपने लोगों को ही वेंडिंग जोन में स्थान दिलाने का आरोप लगाकर विरोध करने लगे।
पहले कैंट बोर्ड ने विरोध करने वालों को दरकिनार कर स्मार्ट जोन की कार्रवाई आगे बढ़ाई, लेकिन अब कदम पीछे खींच लिए हैं। ऐसे में वेंडिंग जोन के माध्यम से रोजगार के आस लगाए बैठे लोग अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब कैंट बोर्ड ने वेंडिंग की योजना को पूरा नहीं करना था तो क्यों पैसे जमा कराए।
वेंडिंग जोन के फेर कई लोगों के पैसे फंसे
वेंडिंग जोन के लिए सौ से अधिक लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। जिस कंपनी को कैंट बोर्ड ने वेंडिंग जोन के लिए अधिकृत कराया था, उसने कैंट बोर्ड की बिना अनुमति लोगों से 20-20 हजार रुपये जमा करा लिए। हालांकि विरोध के बाद कैंट बोर्ड ने कंपनी को पैसे जमा करने से मना कर दिया था, लेकिन इस बीच सौ से अधिक लोग पैसा जमा करा चुके थे। इसमें से कई लोग ऐसे थे, जिन्होंने कर्जा लेकर पैसे जमाए कराए थे।
स्मार्ट वेंडिंग जोन की योजना फिलहाल रोक लगाई गई है। अगले निर्वाचित बोर्ड आने के बाद ही इस पर दोबारा विचार किया जाएगा। जिन लोगों ने पैसे दिए हैं, उनके पैसों को लौटा दिया जाएगा।
-तनु जैन, सीईओ कैंट, देहरादून