रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भले ही कुछ लोग कोशिशें करते रहें लेकिन वह नेपाल से अपने रोटी-बेटी के रिश्ते को टूटने नहीं देंगे। भले ही इसके लिए शीश झुकाना पड़ जाए। बुधवार को देहरादून में सैन्य धाम के भूमि पूजन और शहीद सम्मान यात्रा समापन पर राजनाथ सिंह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि वह घोषणा तो नहीं कर रहे लेकिन दिसंबर के अंत या जनवरी में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन से पूर्व सैनिकों के हित में कई फैसले लेंगे।
हर युवा के लिए प्रेरणा बनेगा यह सैन्य धाम
गुनियाल गांव स्थित उत्तराखंड के पांचवे धाम सैन्य धाम की भूमि पूजन कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नेपाल से हमारे रोटी-बेटी के रिश्ते हैं। सांस्कृतिक रिश्ते हैं। कुछ ताकतें इन रिश्तों को खराब करना चाहती हैं। भले ही हमें अपना शीश झुकाना पड़े लेकिन नेपाल से अपने रिश्तों को टूटने नहीं दिया जाएगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह सैन्य धाम हर युवा के लिए एक प्रेरणा बनेगा।
मोदी सरकार ने आते ही सबसे पहले 40 साल से लटकी पूर्व सैनिकों की वन रैंक, वन पेंशन की मांग को पूरा किया। इसके बाद मैंने रक्षा मंत्री रहते हुए कई अहम फैसले लिए। 2006 से पहले रिटायर हवलदार को ऑनरेरी सूबेदार रैंक के हिसाब से रिवाइज पेंशन का लाभ नहीं मिलता था, हमने उन्हें लाभ दिया। शॉर्ट सर्विस कमीशन से सेना में आए अधिकारियों को सेवा से मुक्त होने के बाद रैंक की इजाजत हमने दी। 50 वर्षों से अटका नेवी, एयरफोर्स पेंशन रेगुलेशन रिवाइज करने का काम किया। बैटल कैजुअलिटी में दो लाख की रकम को बढ़ाकर आठ लाख किया। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान 204 शहीद परिजनों को सम्मानित किया।
भूमि-पूजन और शहीद सम्मान यात्रा का समापन हुआ। कार्यक्रम में रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने कहा कि आज सैन्य सामानों के निर्यात में भारत का नाम दुनिया के शीर्ष-25 देशों में आ चुका है। यह आत्मनिर्भर भारत की मिसाल है। इस मौके पर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक सहित पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
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शहीद वही हो सकता है, जिसके लिए राष्ट्र सर्वोपरि
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री की उपब्लिधों को गिनाया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तारीफ की। राजनाथ सिंह ने पड़ोसी देशों को भी दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि 1734 शहीद परिवारों के आंगन की मिट्टी लेकर उत्तराखंड में सैन्य धाम बनेगा। शहीद वही हो सकता है, जिसके लिए राष्ट्र सर्वोपरि होता है। छोटे मन के लोग यहां काम नहीं कर सकते। जब भारत में ब्रिटिश साम्राज्य था तो 14 और 18 साल के युवाओं ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था। वह राष्ट्र भावना थी। चंद्रशेखर आजाद ने 26 साल में, अशफाक उल्ला खान ने 23 साल की उम्र में बलिदान दिया था। जब अशफाक से पूछा गया कि अंतिम इच्छा क्या है तो उन्होंने कहा कि मेरी मां को यह संदेश भिजवा देना कि आज उसका बेटा फांसी के तख्ते पर खड़ा होकर शादी कर रहा है।
हम दुश्मन को इस पार ही नहीं उस पार भी जाकर मार सकते हैं
रक्षामंत्री ने अपने संबोधन में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि पड़ोसी देश कुछ न कुछ नापाक हरकतें करता रहता है। हम दुश्मन को इस पार ही नहीं उस पार भी जाकर मार सकते हैं। पहले अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बात को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, अब लिया जाता है।
100 लाख करोड़ के गतिशक्ति मास्टर प्लान से मजबूत होगा इंफ्रास्ट्रक्चर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम ने गतिशक्ति मास्टर प्लान का उद्घाटन किया है, जिसकी लागत 100 लाख करोड़ है। इससे देश मे इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो सकेगा। पिछले पांच साल में उत्तराखंड में विकास हुआ है, इसे कोई नकार नहीं सकता। आज सबसे बड़ी चुनौती कनेक्टिविटी की समस्या थी। रेल, रोड और हवाई कनेक्टिविटी की दिशा में काम हुआ है। ऑल वेदर रोड पर जो रुकावट थी, अब दूर हो गई है। ऑल वेदर रोड गढ़वाल और कुमाऊं को और करीब लाएगी। पर्यटन की दृष्टि से, आध्यात्मिक दृष्टि से कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। ऑल वेदर रोड का सामरिक दृष्टि से भी बहुत महत्व है। उन्होंने कहा कि सीमा पर रहने वाले नागरिक हमारे स्ट्रेटेजिक असेट्स हैं।