इन अस्पतालों का भुगतान अभी लटका हुआ है। इसे लेकर कैंटीन संचालक कृष्ण बल्लभ ने संबंधित अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को नोटिस भेजा है। जिसमें भुगतान नहीं होने की स्थिति में खाने की गुणवत्ता बनाए रखने में असमर्थता जताई है। प्रदेश की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने बताया कि चार दिन पहले ही महानिदेशालय से सभी अस्पतालों का बजट जारी कर दिया गया है।
यह रहता है खाने का मैन्यू
कोरोनेशन और गांधी शताब्दी अस्पताल में भर्ती मरीजों को सुबह नाश्ते में दूध, ब्रेड, मक्खन, जबकि दोपहर और रात के वक्त दाल, चावल, रोटी, एक सब्जी, फल या अंडा दिया जाता है। सेलाकुई मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में भी तीन वक्त का यही मैन्यू रहता है। सेलाकुई मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को दोपहर बाद तीन बजे चाय भी दी जाती है।
भर्ती मरीजों की स्थिति
कोरोना काल में भर्ती मरीजों की संख्या कम हुई है। आजकल कोरोनेशन और गांधी शताब्दी अस्पताल में औसतन 100-100 मरीज भर्ती रहते हैं। जबकि, सेलाकुई मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना औसतन 40 मरीज भर्ती रहते हैं।