मानसून सीजन में प्रदेश के सभी पुलों, रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) और फ्लाईओवर की हर 15 दिन में मॉनिटरिंग होगी। इसके तहत सभी पुलों की नियमित जांच की जाएगी ताकि बरसात के मौसम में सड़क धंसाव, पुश्ते गिरने, पिलर झुकने या गिरने की आशंकाओं को कम किया जा सके। इससे जान-माल के संभावित नुकसान को भी कम किया जा सकेगा।
बारिश शुरू होने के साथ ही प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पुलों की एप्रोच रोड धंसने, पुश्ते गिरने, पिलर झुकने या गिरने की घटनाएं हो रही हैं। फ्लाईओवर और आरओबी में भी इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं। इन घटनाओं के कारण कई जगह पुलों पर यातायात रोकने और नियंत्रित करने की भी नौबत आई है। इन दिनों प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में तेज बारिश हो रही है। इसके कारण अधिकांश नदियों में भी उफान है। इससे पुलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इसके तहत विशेषज्ञों की टीम नियमित तौर पर सड़क के लेवल की जांच करेगी।
बड़ासी पुल पर फिलहाल नहीं चलेंगे वाहन
बड़ासी पुल पर फिलहाल वाहन नहीं चलेंगे। एप्रोच रोड के पुस्ते के और टूटने की आशंका को देखते हुए एसडीएम सदर गोपाल राम बिनवाल ने जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव से इसकी सिफारिश की है। वहीं, भोपालपानी पुल की एप्रोच रोड भी धंस गई है, जिस पर एसडीएम ने उस तरफ की रोड बंद करने को कहा है। एक तरफ की एप्रोच रोड में धंसाव हो रहा है, जिस पर वाहन चलाना खतरनाक हो सकता है।
कई बड़े पुलों के एप्रोच रोड को खतरा
प्रदेश के कई बड़े पुल ऐसे हैं, जिनकी एप्रोच रोड कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकती है। बरसात के कारण नए बने पुलों के पुश्ते कई जगह फूल गए हैं, जिनसे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। इसमें ज्यादातर वो पुल शामिल हैं, जिनका निर्माण पिछले एक-दो सालों के दौरान हुआ है। वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में भी कई पुलों की एप्रोच रोड को नुकसान पहुंचा है।
नियमित मॉनिटरिंग से छोटे से छोटे बदलाव पर भी नजर रखी जा सकेगी। जिससे दुर्घटना की संभावना को कम से कम किया जा सके। अगर कहीं भूधंसाव या अन्य कोई दिक्कत दिखती है तो शुरूआती तौर पर उसका ट्रीटमेंट किया जा सकता है। हर 15 दिन में निशान लगाकर लेवल नापा जाता है। इसे नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता, लेकिन मॉनिटरिंग से उसका पता चल जाएगा।
-शरद कुमार बिरला, चीफ इंजीनियर, राष्ट्रीय राजमार्ग