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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव : चेहरा घोषित नहीं करेगी कांग्रेस, सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगी चुनाव 

Sat, 12 Jun 2021 01:08 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

शनिवार को नई दिल्ली में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक में प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता राष्ट्रीय महासचिव व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने प्रतिभाग किया।
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उत्तराखंड कांग्रेस - फोटो : social media
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विस्तार
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उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर चुनाव में नेतृत्व को लेकर उठ रहे तमाम सवालों के बीच पार्टी प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी विधान चुनाव में पार्टी कोई चेहरा घोषित नहीं करेगी। चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा। इसके अलावा पार्टी खटीमा से मसूरी तक परिवर्तन यात्रा निकालेगी। यात्रा की तारीख सरकार की ओर से कोरोना को लेकर नई गाइडलाइन के अनुसार तय की जाएगी। 

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शनिवार को नई दिल्ली में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक में प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता राष्ट्रीय महासचिव व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने प्रतिभाग किया। बैठक में निर्णय लिया गया कि पार्टी आगामी विस चुनाव में बिना किसी चेहरे के उतरेगी।

चुनाव पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। इसके अलावा कोरोना की लहर मंद पड़ते ही सरकार की नई गाइडलाइन के अनुसार पार्टी खटीमा से लेकर मसूरी तक एक यात्रा निकालेगी, जिसे परिवर्तन यात्रा नाम दिया गया है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भाजपा सरकार की कमियां लोगों तक पहुंचाना और नए लोगों का पार्टी से जोड़ना रहेगा। 
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इस दौरान यात्रा कई जनपदों को कवर करेगी। बैठक में पार्टी नेताओं को एकता बनाए रखने और अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया गया। इसके अलावा अनर्गल बयानबाजी से भी दूर रहने को कहा गया है। इस दौरान बैठक कांग्रेस प्रदेश सह प्रभारी राजेश धर्माणी और दीपिका पांडे भी उपस्थित रहे। 

शीर्ष नेताओं को बयानबाजी से दूर रहने के निर्देश
प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने बताया कि पार्टी के शीर्ष नेताओं को सख्त निर्देश दे दिए गए हैं की पार्टी में एकजुटता दिखानी होगी। ऐसे में कोई भी नेता ऐसा बयान न दे, जिससे पार्टी में मनमुटाव की बात सामने आए और पार्टी की एकजुटता को धक्का लगे। 

वर्तमान में तमाम राजनीतिक धार्मिक कार्यक्रमों में प्रतिबंधित है, इसलिए सरकार की नई गाइडलाइन के बाद ही यात्रा की तारीख तय की जाएगी। यात्रा का रूट तय कर लिया गया है। इस यात्रा के माध्यम से ही हरिद्वार और देहरादून जिलों को भी कवर किया जाएगा। पार्टी प्रदेश प्रभारी से बैठक में चर्चा के दौरान इस बात पर सभी नेता एकमत थे कि चुनाव सामूहिक नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। 
- प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

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हरीश, इंदिरा और प्रीतम जरूरी, कांग्रेस की खेमेबाजी से दूरी

प्रदेश कांग्रेस क्षत्रप माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश के लिए कांग्रेस आलाकमान का एक ही फरमान है। 2022 के  विधानसभा चुनाव की डगर को आसान बनाने के लिए तीनों क्षत्रपों के बीच की दूरी खत्म करनी होगी।

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी देवेंद्र यादव के सामने तीनों सियासी ध्रुवों ने एक केंद्र पर आने पर हामी भरी है। पार्टी आलाकमान का मानना है कि तीनों दिग्गज एकजुटता के साथ सियासी मैदान में उतरेंगे तो विपक्ष को पार्टी की आंतरिक मतभेदों को लेकर सवाल उठाने का अवसर नहीं मिल पाएगा। बता दें कि प्रदेश में जब-जब कांग्रेस हमलावर होती है, सत्तारूढ़ भाजपा उसके भीतर सुलग रही खेमेबाजी की दुखती रग को दबा देती है। 

पार्टी प्रदेश प्रभारी की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित बैठक का एजेंडा मीडिया के सामने चाहे जो रखा गया हो, लेकिन राजनीतिक सूत्र इस बात को पुख्ता करते हैं, कि पार्टी आलाकमान चुनाव से पहले अपने घर के कील-कांटे दुरुस्त कर लेना चाहती है। यही वजह है कि पार्टी आलाकमान के निर्देश पर पार्टी प्रदेश प्रभारी तीनों दिग्गजों को लेकर दूसरे दौर की बैठक कर चुके हैं।

आलाकमान को भी इस बात इल्म है कि प्रदेश में कांग्रेस की चुनावी डगर तब तक बहुत मुश्किल है जब तक पार्टी के क्षत्रप अपनी ढपली अपना राग अलापते रहेंगे। इसीलिए पार्टी प्रभारी की ओर से आलाकमान का संदेश साफ कर दिया गया कि विधानसभा चुनाव की जंग सामूहिक नेतृत्व में लड़ी जाएगी। साथ ही तीनों क्षत्रप पार्टी एकजुटता के साथ मैदान में उतर कर कांग्रेस की ताकत को बढ़ाएंगे।

यह संदेश साफ करना पार्टी की मजबूरी भी है। दरअसल, राज्य की राजनीति में जब-जब कांग्रेस ने प्रदेश के मुद्दों को लेकर आक्रामक तेवर के साथ मैदान में उतरी है, सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के बीच खेमेबाजी को हवा देकर उसे हल्का कर दिया। प्रीतम सिंह भले इस वक्त प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाल रहे हों और इंदिरा के पास नेता प्रतिपक्ष का दायित्व हो, लेकिन हरीश रावत को पार्टी किसी भी तरह से नजरअंदाज नहीं कर सकती है। हरीश की उत्तराखंड कांग्रेस में अपना एक जनाधार है।

सियासत में उनके अनुयायियों की अच्छी-खासी संख्या है। वो राज्य की सियासत में अकसर उथल-पुथल मचाते रहे हैं और दमदार तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं। पार्टी अलाकमान भी इस बात को भली-भांति समझता है। इसलिए वह तीनों दिग्गजों को एक मंच पर लाकर जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं में एकता का संदेश देना चाहते हैं। यदि चुनाव से पूर्व पार्टी अलग-अलग खेमों बंटी नजर आती है तो नुकसान पार्टी को ही होना है।
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