उत्तराखंड कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष और संगठनात्मक स्तर पर किए जाने वाले वाले बदलाव की फाइल मंगलवार को भी आगे नहीं बढ़ी। माना जा रहा था कि पंजाब कांग्रेस का मुद्दा सुलझ जाने के बाद कांग्रेस हाईकमान उत्तराखंड के मुद्दे पर फैसला ले लेगा, लेकिन मंगलवार का दिन भी रिक्त चला गया।
पार्टी प्रदेश प्रभारी के सोमवार को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिले थे। ऐसे में संकेत मिले थे कि मंगलवार को पार्टी नेता प्रतिपक्ष और संगठन स्तर पर किए जाने वाले बदलावों की घोषणा की जा सकती है। लेकिन अब मामला फिर से आगे बढ़ता दिख रहा है।
बुधवार को ईद और गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस का राजभवन कूच है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि अब इस मुद्दे पर दो-तीन दिन के बाद ही फैसला बाहर आएगा। इस बीच मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस भवन में भी नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और कार्यवाहकों अध्यक्षों के अलग-अलग नामों को लेकर दिनभर चर्चाओं का दौर चलता रहा।
उत्तराखंड में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद रिक्त हुई नेता प्रतिपक्ष की सीट को लेकर तमाम माथापच्ची के बाद भी अब तक कोई हल नहीं निकल पाया है।
पार्टी ने इसके लिए समन्वय समिति बनाकर हल निकालने का प्रयास किया, लेकिन नेता प्रतिपक्ष के साथ प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी चेहरा बदले जाने की बात सामने आने के बाद मामला फंस गया। इसके बाद समन्वय समिति ने अपनी रिपोर्ट बनाकर कांग्रेस हाईकमान को सौंप दी।
जिस पर अभी फैसला नहीं लिया गया है। इस बीच पंजाब कांग्रेस का मामला फंस जाने के बाद उत्तराखंड दूसरी प्राथमिकता में आ गया। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि आज पार्टी इस पर फैसला ले सकती है।
इनके नाम की चर्चा
पार्टी प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष की इस दौड़ में गणेश गोदियाल, प्रदीप टम्टा, गोविंद सिंह कुंजवाल, ममता राकेश, काजी निजामुद्दीन समेत कई नेताओं के नाम सियासी चर्चाओं में तैर रहे हैं। पार्टी का एक गुट अध्यक्ष के दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की भी राय दे रहा है।
दो खेमों में बंटे विधायक
नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर जब कवायद शुरू हुई तो दावेदार विधायकों के दो खेमों में बंटने की खबरें आने लगी। सूत्रों की मानें तो आलाकमान नहीं चाहता कि चुनाव से ऐन पहले पार्टी खेमबाजी में बंटी नजर आए। इसलिए वह कोई बीच का रास्ता निकालने की जुगत में है।
कांग्रेस पर ये भी दबाव
अभी तक कांग्रेस जिस रणनीति पर काम कर रही थी, उसमें नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी गढ़वाल के किसी ठाकुर नेता को दिए जाने और प्रदेश अध्यक्ष के पद पर कुमाऊं से किसी ब्राह्मण चेहरे को लाने की थी, लेकिन सत्ता पक्ष ने कुमाऊं के साथ तराई और युवा चेहरे पर दांव लगाते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पुष्कर सिंह धामी को बैठा दिया। ऐसे में अब कांग्रेस को सियासी नफा-नुकसान को देखते हुए नए समीकरण तलाशने के लिए मजबूर कर दिया है।