उत्तराखंड में अब पशुपालकों को घर पर ही पशु चिकित्सा की सुविधा मिलेगी। प्रदेश में पहली बार मोबाइल चिकित्सा वैन योजना शुरू कर दी गई है। यह सेवा 1962 डायल करने पर उपलब्ध होगी। बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 60 मोबाइल चिकित्सा वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके अलावा बागेश्वर, अल्मोड़ा, चमोली, पौड़ी, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग जिले में गोट वैली योजना भी शुरू की गई।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पशु चिकित्सकों को एनपीए (नॉन प्रैक्ट्सि एलाउंस) देने की घोषणा की। कहा कि मोबाइल पशु चिकित्सा वैन से दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों पर पशु चिकित्सा सेवाएं आसानी से उपलब्ध होंगी। नेशनल डिजिटल लाइव स्टॉक मिशन को चंपावत और ऊधमसिंहनगर जिलों में भी प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहली बार डेयरी पशुओं का सबसे बड़ा डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक डेयरी पशु को एक विशिष्ट टैग लगाया जा रहा है।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री पशुपालन व डेरी विकास डॉ.संजीव कुमार बालियान ने प्रदेश के 35 और मोबाइल पशु चिकित्सा वैन उपलब्ध कराने का एलान किया। वहीं, मुख्यमंत्री ने कहा कि लंपी रोग से बचाव के लिए प्रदेश में लगभग 6 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि 10.73 करोड़ की लागत से हीफर रियरिंग फार्म से पशुपालकों को प्रत्येक वर्ष उच्च नसल की 270 गाय उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पशुपालन व्यवसाय स्वरोजगार का बड़ा जरिया बन सकता है। इसके लिए सरकार ने नई योजनाएं शुरू की हैं।