मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत अपने तीन दिवसीय दिल्ली प्रवास से लौट आए हैं। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के सभी प्रमुख मंत्रियों के दरवाजे पर दस्तक दी और कई मंत्रियों से लंबित प्रस्तावों पर हामी भी भरवाई। लेकिन असल चुनौती मंजूर प्रस्तावों को जमीन उतारने की है। सरकार के पास वक्त बहुत ज्यादा नहीं है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस बार मुख्यमंत्री दिल्ली प्रवास पूरे होमवर्क के साथ गए थे। जिस मंत्री के दरवाजे पर उन्होंने दस्तक दी, उनके पीछे राज्य के आलाधिकारियों की टीम भी मौजूद रही। दो चरणों के प्रवास में मुख्यमंत्री ने सड़क, कृषि, वन व पर्यावरण, उद्योग, नागरिक उड्डयन, रेल, पशुपालन, संचार, खेल से संबंधित प्रस्तावों पर केंद्रीय मंत्रियों से हामी भरवाई। कुछ मसलों पर धनराशि जारी करने पर केंद्रीय मंत्रियों ने सहमति दी तो कुछ में सैद्धांतिक मंजूरी मिली।
दिल्ली से लौटने के बाद अब मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती केंद्रीय मंत्रियों से मंजूर प्रस्तावों को अमलीजामा पहनाने की है। सरकार के पास बामुश्किल पांच से छह महीने का समय है। जून और जुलाई का महीना मानसून की तैयारी में निपट जाएगा।
सितंबर, अक्तूबर और नवंबर महीने काम के साथ विधानसभा चुनाव की तैयारियों के भी होंगे। यही वजह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय आलाधिकारियों की एक टीम बनाने जा रहा है जो मंजूर प्रस्तावों पर लगातार समीक्षा करेंगे और उन्हें जमीन पर उतारने में जुटेंगे।
जल्द बंट सकती हैं दायित्वों की रेवड़ियां
प्रदेश सरकार में जल्द ही दायित्वों की रेवड़ियां बंट सकती है। पार्टी के नेताओं और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की दायित्व पर नजर लगी है। प्रदेश संगठन भी इस बारे में संकेत साफ कर चुका है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के दिल्ली प्रवास से लौटने के बाद दायित्वों के आवंटन की चर्चाएं हैं।