ऊर्जा के क्षेत्र से जुड़े दो निगमों यूपीसीएल और पिटकुल की भारी लापरवाही नुकसान का सबब बनी है। कैग की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। एक ओर यूपीसीएल को लेटलतीफी की वजह से करोड़ों रुपये का अर्थदंड भरना पड़ा है तो दूसरी ओर पिटकुल ने सरकार के नियमों के हिसाब से लेबर सेस न वसूलकर राजस्व का नुकसान किया है।
कैग रिपोर्ट में खुलासा : उत्तराखंड के लोगों का स्वास्थ्य भगवान भरोसे
30 दिन के भीतर जारी नहीं किए बिजली कनेक्शन, लगा 18 करोड़ का फटका
नियामक आयोग के नियमों के हिसाब से उपभोक्ता को आवेदन करने के 30 दिन के भीतर बिजली कनेक्शन देना होता है लेकिन इस नियम में यूपीसीएल की लापरवाही की वजह से 18 करोड़ 82 लाख रुपये का जुर्माना लगा।
वर्ष 2016-17 से 2018-19 के बीच कुल एक लाख 53 हजार 995 बिजली कनेक्शन दिए गए, जिनमें से पांच हजार 91 कनेक्शन ऐसे थे जो कि निर्धारित 30 दिन के बाद दिए गए।
इनमें से भी 2554 कनेक्शन एक से 30 दिन विलंब से, 1354 कनेक्शन 31 से 90 दिन विलंब से, 746 कनेक्शन 91 से 160 दिन विलंब से, 325 कनेक्शन 181 से 365 दिन और 112 ऐसे कनेक्शन थे जो कि एक साल से भी ज्यादा विलंब के बाद दिए गए। अप्रैल 2019 में यूपीसीएल पर 18 करोड़ 82 लाख रुपये का जुर्माना लगा।
मीटरों को लेकर लापरवाही से भी करोड़ों का नुकसान
यूपीसीएल को जले मीटरों को बदलने, दोषपूर्ण मीटरों को बदलने, मीटरों का परीक्ष्ज्ञण करने और सेवाओं का रूपांतरण करने में भी लेटलतीफी भारी पड़ी। मई 2019 से अगस्त 2019 तक जले मीटरों से संबंधित 9,131 शिकायतें मिली, जिनमें से 8508 शिकायतों के निराकण में यूपीसीएल ने एक दिन से लेकर 1058 दिनों तक का विलंब किया।
इस लेटलतीफी की वजह से निगम को दो करोड़ छह लाख का जुर्माना भरना पड़ा। इसी प्रकार मई 2019 से अगस्त में यह पाया गया कि मीटरों का परीक्षण करने की 11443 शिकायतें प्राप्त हुई, जिनमें से 5,142 शिकायतों का निपटारा एक से 1156 दिन विलंब से किया गया। इसके चलते निगम को 66 लाख 34 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ा।
दोषपूर्ण मीटर बदलने के मामले में भी निगम के पास 45761 शिकायतें आईं, जिनमें से 13698 शिकायतों को निगम ने एक से 1203 दिनों के विलंब से निपटाया, जिसके चलते निगम को चार करोड़ 83 लाख रुपये का अर्थदंड भरना पड़ा।
संपत्ति का स्वामित्व बदलने पर उपभोक्ता का नाम बदलने की सेवा के मामले में भी 8972 में से 712 प्रकरणों में समय से कार्रवाई नहीं हुई, जिस वजह से निगम को 23 लाख 78 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ा।