नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृदयेश ने कहा कि इस मामले का भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संज्ञान लिया। इससे बड़ी बात नहीं हो सकती है। प्रदेश और देश की महिलाएं आक्रोशित हैं। उनकी पार्टी भी नाराज है। बंशीधर भगत के लिए इतनी सजा काफी है। मैंने उन्हें माफी मांगने के लिए बिल्कुल नहीं कहा। वह अड़े रहें और उसके बाद भी अपने पद पर बने रहे हैं। इंदिरा ने कहा कि अब भगत आंख चुराना चाह रहे हैं।
भाजपा में शामिल होने की बात के सवाल पर इंदिरा ने कहा कि मेरे जैसे कांग्रेस के बड़े नेतृत्व को पार्टी में शामिल कराना इनके हाथ में नहीं है। वह जेपी नड्डा या मोदी जी ही करा सकते हैं। कभी मैंने कोई अर्जी नहीं दी। पार्टी में मेरी बड़ी प्रतिष्ठा है। प्रदेश कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष का सर्वोच्च पद मुझे प्राप्त है। इनकी पार्टी में मेरी क्या दिलचस्पी। न ही मेरी विचारधारा इनके साथ है, न मेरा तौरतरीका है। मेरी कोई रूचि नहीं है कि भगत ने माफी मांगी।
आलोचना के बीच में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की तारीफ पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत गाहे-बगाहे करते रहे हैं। बुधवार को एक बार फिर हरीश रावत ने सीएम त्रिवेंद्र रावत का धन्यवाद किया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने हाल ही में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के खिलाफ एक कार्यकर्ता सम्मेलन में टिप्पणी की थी। इस पर कांग्रेस ने नाराजगी जताई तो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट कर भगत की ओर से कांग्रेस से माफी मांगी। फेसबुक पेज पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने लिखा कि भगत की टिप्पणी पर खेद जताकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सूझबूझ का परिचय दिया और अपनी पार्टी को आंशिक रूप से फजीहत से बचा लिया। इसी के साथ पूर्व सीएम ने यह भी लिखा कि नर्सिंग के बच्चों को राहत देना भी अच्छा लगा है।
प्रदेश में नर्सिंग के 1200 पदों पर भर्ती होनी है। इसमें सरकार की ओर से 30 बेड के अस्पताल में एक साल के अनुभव की शर्त रखी थी। इस पर पूर्व सीएम ने एतराज जताया था और कहा था कि पूरे पहाड़ में कहीं भी 30 बेड का अस्पताल नहीं है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को इस शर्त को हटाने का एलान किया था। मुख्यमंत्री कोरोना के कारण एम्स दिल्ली में भर्ती थे और स्वस्थ होने पर मंगलवार से ही उन्होंने काम करना शुरू कर दिया था।