बाबा नीम करौरी महाराज के कनिष्ठ पुत्र धर्म नारायण शर्मा (81) के निधन से बाबा के भक्तों ने दुख व्यक्त किया है। धर्म नारायण को कैंची आश्रम से विशेष लगाव था और वे साल में एक बार कैंची स्थित आश्रम में पहुंचते थे।
बता दें कि सोमवार को फरीदाबाद के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह काफी समय से बीमार थे। जानकारी के मुताबिक वृंदावन (मथुरा) के परिक्रमा मार्ग स्थित बाबा नीम करौरी आश्रम के गौशाला परिसर में सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। कैंची धाम के प्रबंधक विनोद जोशी ने बताया कि बाबा नीम करौली महाराज के दो पुत्र और एक पुत्री हैं।
ज्येष्ठ पुत्र अनेक सिंह अपने परिवार के साथ भोपाल में रहते हैं, जबकि कनिष्ठ पुत्र धर्म नारायण शर्मा वन विभाग में रेंजर के पद पर रहे हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद 35 वर्षों से वृंदावन आश्रम में ही निवास कर रहे थे। वह अपने पीछे पांच पुत्रियों के भरे पूरे परिवार छोड़ गए। जबकि बाबा नीम करौरी महाराज की पुत्री गिरजा देवी आगरा में रहती हैं।
बकौल जोशी धर्म नारायण शर्मा को कैंची से विशेष लगाव था। वह हर साल 15 जून को आश्रम के स्थापना दिवस पर कैंची आते थे। प्रबंधक जोशी बताते हैं कि इस बार भी वह कैंची आने वाले थे, लेकिन ईश्वर को शायद यह मंजूर नहीं था।
बाबा ने कैंची में स्थापित किया था पहला आश्रम
कैंची धाम के प्रबंधक विनोद जोशी बताते हैं कि बाबा नीम करौरी महाराज ने देश के अलग-अलग शहरों में हनुमानजी के 108 मंदिरों और दो आश्रमों की स्थापना कीं। कैंची में पहला और वृंदावन में स्थापित दूसरे नंबर का आश्रम है।
बाबा ने नीम करौरी गांव में की थी साधना
नैनीताल। बाबा नीम करौरी महाराज का असली नाम पंडित लक्ष्मीनारायण शर्मा है। कहा जाता है कि जब पंडित लक्ष्मीनारायण शर्मा फर्रुखाबाद के गांव नीम करौरी में साधनारत थे, तब उन्हें हनुमानजी के साक्षात दर्शन हुए। तब से बाबा का नाम नीम करौरी महाराज पड़ गया।