पुलिस ने पहले इस प्रदर्शन और बलवे का नेतृत्व करने वाले का नाम मीनू उर्फ कृपाल बताया था। लेकिन, मुकदमे में 16 दिन बाद अचानक प्रेमचंद अग्रवाल का नाम जोड़ दिया और कहा कि उनके नेतृत्व में यह सब घटनाक्रम हुआ। इस पर भी संदेह पैदा हुआ।
मुर्दाबाद का नारा गाली-गलौच नहीं: कोर्ट
कोर्ट ने मुर्दाबाद के नारे पर टिप्पणी की है। अभियोजन ने कहा था कि पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद का नारा लगाकर मौके पर शांति भंग करने और भय का माहौल बनाया गया। इसके लिए उनके खिलाफ 504 यानी गाली गलौच करने की धारा लगाई गई। इस पर कोर्ट ने कहा है कि भारतीय संविधान के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी है। इसमें सैद्धांतिक तौर आलोचना या विरोध करने का अधिकार भी निहित है। मुर्दाबाद का नारा लगाना गाली गलौच की श्रेणी में नहीं आता है।