फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Uttarakhand: चमोली मामले में बोले ओवैसी, क्या मुसलमानों को समानता से जीने का अधिकार नहीं?

Mon, 21 Oct 2024 11:14 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क अमर उजाला, देहरादून

सार

ओवैसी ने एक्स पर लिखा कि समान नागरिक संहिता का कानून बनाने वाले उत्तराखंड में क्या मुसलमानों को समानता से जीने का अधिकार नहीं है।
विज्ञापन
असदुद्दीन ओवैसी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के संस्थापक असदुद्दीन ओवैसी ने चमोली व्यापार मंडल की 15 मुस्लिम परिवारों को क्षेत्र छोड़कर चले जाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। ओवैसी ने एक्स पर लिखा कि समान नागरिक संहिता का कानून बनाने वाले उत्तराखंड में क्या मुसलमानों को समानता से जीने का अधिकार नहीं है।

विज्ञापन


वे अछूत हो गए। उधर, इस मसले पर स्थानीय भाजपा नेता का कहना है कि उन्हें लंबे समय से चमोली में रह रहे मुस्लिम परिवारों से कोई परेशानी नहीं है। मगर उन आसामाजिक तत्वों से दिक्कत है, जो पिछले कुछ महीनों से किराये के मकान लेकर यहां रह रहे हैं और कोई काम धंधा नहीं कर रहे हैं। ऐसे तत्व स्थानीय महिलाओं और बेटियों पर फब्तियां कसते हैं। इन लोगों को 31 दिसंबर तक क्षेत्र छोड़कर चले जाने के लिए कहा गया है।

बहरहाल, इस मामले में ओवैसी के बयान से सियासी संग्राम छिड़ने के आसार हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, मुसलमानों को भारत में अछूत बना दिया गया है। उत्तराखंड के चमोली में 15 मुसलमान परिवारों का सामूहिक बहिष्कार किया जा रहा है। चमोली के व्यापारियों ने धमकी दी है कि 31 दिसंबर तक मुसलमानों को चमोली छोड़ देना होगा। अगर मकान मालिक मुसलमानों को घर देंगे, तो 10 हजार रुपये जुर्माना देना होगा।
विज्ञापन


आदमखोर गुलदार की दहशत: टिहरी के महर गांव में शूटर तैनात, ड्रोन और ट्रैप कैमरों से हो रही तलाश, तस्वीरें

विज्ञापन

ये वही उत्तराखंड है जहां की सरकार समनाता के नाम पर यूनिफार्म सिविल कोड लागू कर रही है। क्या चमोली के मुसलमानों को समानता और सम्मान से जीने का हक नहीं है? वह आगे लिखते हैं, मोदी अरब में शेखों से गले मिल सकते हैं, तो चमोली के मुसलमानों को भी गले लगा सकते हैं। आखिरकार मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं, सऊदी या दुबई के तो नहीं हैं।

स्थानीय लोगों को इलाका छोड़ने के संबंध में व्यापार मंडल संघ से स्पष्टीकरण लिया गया है। उनका कहना है कि उन्होंने जन चेतना रैली निकाली थी। उनकी मंशा है कि वहां बिना सत्यापन के जो लोग रेहड़ी-फड़ी लगा रहे थे, उनका सत्यापन होना चाहिए। उनका मुख्य उद्देश्य था कि उनके इलाके में कोई अप्रिय घटना या कानून व्यवस्था की स्थिति पैदा न हो। उनके द्वारा वहां रैली निकाली गई थी। स्थिति सौहार्दपूर्ण है और किसी भी तरह का कोई तनाव नहीं है।
-डॉ. संदीप तिवारी, जिलाधिकारी, चमोली

हम लोगों ने एक जनजागृति रैली निकाली थी। पिछले पांच-छह महीनों से यहां कई असामाजिक तत्व रह रहे हैं। वे कोई काम धंधा नहीं करते हैं। हमारे क्षेत्र की बहू-बेटियों पर फब्तियां कसते हैं। उन लोगों से हमने कहा है कि आप लोग यहां से चले जाइए, जो हमारे साथ लंबे समय से रह रहे हैं, उनसे हमें कोई आपत्ति नहीं है।
-संजय रावत, जिला उपाध्यक्ष, चमोली भाजपा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें