ये वही उत्तराखंड है जहां की सरकार समनाता के नाम पर यूनिफार्म सिविल कोड लागू कर रही है। क्या चमोली के मुसलमानों को समानता और सम्मान से जीने का हक नहीं है? वह आगे लिखते हैं, मोदी अरब में शेखों से गले मिल सकते हैं, तो चमोली के मुसलमानों को भी गले लगा सकते हैं। आखिरकार मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं, सऊदी या दुबई के तो नहीं हैं।
स्थानीय लोगों को इलाका छोड़ने के संबंध में व्यापार मंडल संघ से स्पष्टीकरण लिया गया है। उनका कहना है कि उन्होंने जन चेतना रैली निकाली थी। उनकी मंशा है कि वहां बिना सत्यापन के जो लोग रेहड़ी-फड़ी लगा रहे थे, उनका सत्यापन होना चाहिए। उनका मुख्य उद्देश्य था कि उनके इलाके में कोई अप्रिय घटना या कानून व्यवस्था की स्थिति पैदा न हो। उनके द्वारा वहां रैली निकाली गई थी। स्थिति सौहार्दपूर्ण है और किसी भी तरह का कोई तनाव नहीं है।
-डॉ. संदीप तिवारी, जिलाधिकारी, चमोली
हम लोगों ने एक जनजागृति रैली निकाली थी। पिछले पांच-छह महीनों से यहां कई असामाजिक तत्व रह रहे हैं। वे कोई काम धंधा नहीं करते हैं। हमारे क्षेत्र की बहू-बेटियों पर फब्तियां कसते हैं। उन लोगों से हमने कहा है कि आप लोग यहां से चले जाइए, जो हमारे साथ लंबे समय से रह रहे हैं, उनसे हमें कोई आपत्ति नहीं है।
-संजय रावत, जिला उपाध्यक्ष, चमोली भाजपा