उत्तराखंड में कंडी मार्ग का इतिहास करीब 200 साल पुराना है। उत्तर प्रदेश के वक्त में भी इसी मार्ग से हिल अलाउंस के लिए कर्मचारियों की पहाड़ और मैदान की श्रेणी का विभाजन होता था। असल में टनकपुर ब्रह्मदेव मंडी से कोटद्वार तक जाने वाला मार्ग लगभग दो सौ साल पुराना है। ब्रिटिस सरकार इसे सब माउंटेन सड़क के नाम से पुकारती थी। उत्तरप्रदेश के समय पहाड़ और मैदान की सीमा रेखा को इसी से तय किया जाता था। यानी उस समय सड़क के उत्तरी भाग में काम करने वाले सरकारी मुलाजिमों को यूपी सरकार हिल एनाउंस दिया करती थी।
2001 में प्रमुख सचिव दिया था सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा
वर्ष 2001 में उत्तराखंड के प्रमुख वन सचिव मधुकर गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था कि यह सड़क फेयर वेदर रोड है इसे आल वैदर बनाया जा रहा है। यह वन्यजीव अधिनयम से पहले की रोड है लेकिन न्यायालय ने यह आदेश दे दिया कि नेशनल पार्क के बीच से सड़क नहीं जाएगी। वर्ष 2014 में पीसी जोशी ने हाइकोर्ट में निवेदन किया था कि उनकी पुरानी रिट को रिकाल किया जाए। जिसे मान लिया गया और न्यायालय ने सम्बन्धित सम्बन्धित विभाग और सरकार को आदेश दिया कि सड़क बनाने में कितना समय लगेगा, इसका हलफनामा दें। मगर पीसी जोशी ने अपनी रिट वापस ले ली।
हरक सिंह रावत व महाराज का ड्रीम प्रोजेक्ट
वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज कंडी मार्ग को बनाने का सपना काफी समय से देख रहे थे। यहां बस संचालन पर रोक लगने से इस मार्ग के खुलने के अरमानों पर पानी फिर गया था। असल में हर बार इस मार्ग पर अड़ंगा लगाने वाले लोग सक्रिय हो जाते थे। इस बार सरकार ने सभी जगहों पर मजबूती से पैरवी की और इसमें सफलता मिल गई।
रामनगर-कोटद्वार के बीच की दूरी घटेगी
कंडी मार्ग बनने से रामनगर-कोटद्वार की दूरी कम हो जाएगी। वर्तमान में वाया उत्तर प्रदेश होकर गुजरने से कोटद्वार की दूरी 162 किलोमीटर है, जबकि इस मार्ग के बन जाने से यह दूरी महज 88 किमी होगी। इसके अलावा कोटद्वार, हरिद्वार का रामनगर व हल्द्वानी के बीच व्यापार कि साथ पर्यटन गतिविधियां भी बढ़ेंगी। राजधानी आने जाने में भी कम समय लगेगा।
पूर्व सीएम त्रिवेंद्र ने 2017 में की थी कंडी मार्ग खोलने की घोषणा
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 20 मार्च 2017 को कंडी मार्ग खोलने की घोषणा की थी। इसके बाद 25 दिसंबर को वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कोटद्वार से रामनगर के लिए गढ़वाल मोटर ऑनर्स की बस सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। लेकिन तब गौरव बंसल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बसों के संचालन पर रोक लगा दी थी।