तुंगनाथ समेत ऊपरी क्षेत्रों में ठंड बढ़ने व बर्फबारी से यहां प्रवास करने वाली 300 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों में से 150 प्रजातियां घाटी और मैदानी क्षेत्रों की तरफ उड़ान भरने लगी हैं। ये पक्षी टोलियों में बनियाकुंड, मक्कू फॉरम और मक्कू गांव तक पहुंचने लगे हैं। सुबह से देर शाम तक जंगलों में इन पक्षियों की चहचाहट सुनी जा सकती है।
अक्तूबर मध्य से उच्च हिमालय से लगे वन क्षेत्रों में प्रवास करने वाले पक्षियों का निचले क्षेत्रों में आना शुरू हो जाता है। बीते दो सप्ताह से बनियाकुंड, मक्कू फॉरम और मक्कूमठ गांव से लगे जंगलों में गोल्डन बुश रॉबिन, हिमालयन बुल्यूटेल, चेशनेट टिशिया, इस्केली ब्रिस्टेड रेनबेवलर, ब्यू फोटेड रेड स्टार, रेड हेडेड बुलफिंच, डार्क बिस्टेड रोचफिंच, हिमालनयन ग्रीन फिंच समेत डेढ़ सौ पक्षी प्रजातियां यहां प्रवास कर रही हैं।
यही नहीं, बर्फबारी होते ही नवंबर से फरवरी तक अन्य पक्षी प्रजातियां भी काकड़ागाड़, पलद्वाड़ी, रुद्रप्रयाग और श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की झील तक पक्षियों की अन्य प्रजातियां भी घाटी इलाकों में लौट आती हैं। इन पक्षी प्रजातियों में उच्च हिमालय में प्रवास करने वाली वाइट कैप्ट वाटर रेड स्टार्ट तो शीतकाल में ऋषिकेश से लेकर देहरादून तक पहुंच जाती है। लगभग चार माह यहां प्रवास करते हुए मार्च-अप्रैल में पुन: यह पक्षी नेस्टिंग के लिए 09 से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर लौट आती है।
बर्फीला तीतर पक्षी ही करता है बर्फबारी में भी प्रवास
उच्च हिमालय में प्रवास करने वाली पक्षी प्रजातियों में अकेला बर्फीला तीतर ऐसा पक्षी है, जो भारी बर्फबारी के बाद भी ऊपरी क्षेत्रों में प्रवास करता है। यह पक्षी 12 से 14 हजार फीट की ऊंचाई तक प्रवास करता है।
उत्तराखंड में 700 से अधिक पक्षी प्रजातियों में अकेले रुद्रप्रयाग जिले में तीन सौ से अधिक प्रजातियां प्रवास करती हैं। अक्तूबर से इन पक्षियों की डेढ़ सौ से अधिक निचले इलाकों के लिए उड़ान भरना शुरू कर देती हैं। ग्रीष्मकाल शुरू होते ही ये पुन: उच्च हिमालय की तलहटी के जंगलों में लौट आती हैं।
- यशपाल सिंह नेगी, राष्ट्रीय स्तरीय बर्ड वाचर, मक्कूमठ, रुद्रप्रयाग