राजकीय दून मेडिकल अस्पताल की पोस्ट कोविड ओपीडी समेत अन्य विभिन्न अस्पतालों में इस तरह के मरीज पहुंच रहे हैं। पहले आमतौर पर 55 साल से अधिक उम्र के लोगों में यह बीमारी होती थी। कोरोना के बाद हर वर्ग के लोगों में यह समस्या आ रही है। दून अस्पताल के ई-हॉस्पिटल के प्रभारी डॉ. सुशील कुमार ओझा ने बताया कि पोस्ट कोविड ओपीडी में इस तरह के मरीज आ रहे हैं। अस्थायी तौर पर उन्हें भूलने की समस्या हो रही है। उनकी काउंसिलिंग की जा रही है। साथ ही इससे उभरने के लिए टिप्स भी दिए जा रहे हैं।
पोस्ट प्रोमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर है यह समस्या : डॉ. बिष्ट
राजकीय जिला कोरोनेेशन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एनएस बिष्ट ने बताया कि इस बीमारी को डिमेंशिया कहना उचित नहीं होगा। यह पोस्ट प्रोमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीपीएसडी) बीमारी कहलाती है। यह अक्सर हो जाती है। ऐसे मरीजों की काउंसिलिंग कर उन्हें चिकित्सीय सलाह दी जा रही है। अगर कोरोना के बाद फेफड़े स्वस्थ हैं तो उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।
इन बातों का रखें ख्याल
- नियमित रूप से सुबह के वक्त योग व व्यायाम करें
- पानी खूब पीएं
- लिक्विड डाइट अधिक मात्रा में लें
- विटामिन युक्त भोज्य पदार्थों का सेवन करें और फास्ट फूड, जंक फूड का इस्तेमाल न करें
- धूम्रपान, शराब और अन्य किसी तरह के नशे का सेवन न करें