जिस तरह से ब्लैक फंगस आंख, नाक, कान, गले और अन्य अंगों में फैल रहा है अगर यह भी फेफड़ों से इतर दूसरे अंगों में फैलने लगेगा तो अत्यंत घातक हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी के इलाज की टेबलेट और इंजेक्शन दवाएं फिलहाल उपलब्ध हैं।
घबराएं नहीं. सभी जरूरी जांचें कराएं
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. कुमार जी. कॉल का कहना है कि अगर किसी भी तरह के लक्षण दिखाई दें तो तत्काल अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी जांच आवश्यक तौर पर करा लें। जब तक सभी रिपोर्ट सामान्य न आ जाएं और डॉक्टर सलाह न दें तब तक अस्पताल में ही इलाज कराएं।
अस्पताल से घर पहुंचे, 10 मिनट में फोन आया फिर भर्ती होना पड़ेगा
कोरोना से संक्रमित हुए एक युवक के चेहरे और आंखों में सूजन आने पर उन्होंने दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों को दिखाया। डॉक्टरों ने ब्लैक फंगस का संदिग्ध मरीज मानकर उन्हें भर्ती कर लिया। शनिवार को विभिन्न जांच में ब्लैक फंगस की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। इस बीच डॉक्टर के पास मरीज की एक अन्य जांच रिपोर्ट आई। पता लगा कि युवक को एस्परजिलस नामक फंगस इंफेक्शन है। पीड़ित अस्पताल से घर पहुंचा ही था कि 10 मिनट बाद अस्पताल से फोन आया कि उन्हें फिर से भर्ती होना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि अस्पताल में समुचित इलाज मिल रहा है और उन्हें कोई दिक्कत नहीं हो रही है।