निर्वाचन कार्यालय की ओर से मतदाता सूची तैयार करने से पूर्व की गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं। प्रथम दृष्टया प्रदेश के 289 मतदेय स्थल ऐसे चिन्हत किए गए हैं, जिनका विलय किया जाएगा। एक मतदेय स्थल पर अधिकतम 1500 मतदाता ही रहेंगे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी सौजन्या ने बताया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत पहले चरण में वर्तमान मतदेय स्थलों का स्थलीय वेरिफिकेशन किया जा रहा है। जो मतदेय स्थल जीर्ण-शीर्ण स्थिति में हैं, उनकी जगह दूसरी सरकारी इमारतों में मतदेय स्थल बनाए जाएंगे। मतदेय स्थल किसी प्राइवेट भवन, पुलिस थाना, अस्पताल, धर्मशाला, मंदिर या धार्मिक स्थान पर नहीं होगा। एक मतदेय स्थल पर अधिकतम 1500 वोटर ही होंगे। यह भी देखा जाएगा कि किसी मतदेय स्थल तक मतदाता को पहुंचने में दो किलोमीटर से अधिक की पैदल दूरी तो तय नहीं कर पड़ रही है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 289 मतदेय स्थल ऐसे चिन्ह्ति किए गए हैं जिनका विलय प्रस्तावित है। इनमें सबसे ज्यादा 97 हरिद्वार के हैं। इसके अलावा देहरादून के 66, नैनीताल के 37, उत्तरकाशी, चमोली के चार-चार, रुद्रप्रयाग के 12, टिहरी के 11, पौड़ी के 20, पिथौरागढ़ व अल्मोड़ा के छह-छह, बागेश्वर व चंपावत के पांच-पांच, ऊधमसिंह नगर के 16 मतदेय स्थलों का विलय होगा।