उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों पर पुलों, सुरंगों, फ्लाईओवर और चौड़ीकरण के 43 प्रस्ताव केंद्रीय सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय में विचाराधीन हैं। कोविड-19 महामारी से निपटने में व्यस्त रही प्रदेश सरकार अब 2362 करोड़ के इन प्रस्तावों की मंजूरी के लिए जोर लगा रही है। प्रदेश सरकार की यह कोशिश है कि चुनावी साल में वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले वह परिवहन मंत्रालय से ज्यादा से ज्यादा प्रस्तावों की मंजूरी दिला दे। इस साल अभी तक 147.69 करोड़ के छह प्रस्तावों को केंद्र से मंजूरी मिल चुकी है।
केंद्र सरकार को भेजने के लिए 1750.38 करोड़ रुपये के छह कार्य हैं। 213.44 करोड़ के इन प्रस्तावों में तीन मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं और तीन को तैयार कर भेजे जाने की तैयारी है। करीब 286 करोड़ की लागत से 143 किमी सड़क के प्रस्ताव है। इसके अलावा 573 किमी एनएच का चौड़ीकरण होना है। इसकी डीपीआर तैयार करने के लिए 18 करोड़ रुपये केंद्र से मांगे गए हैं। इसी तहत टनल निर्माण की डीपीआर तैयार करने के लिए भी केंद्र को 25 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। 90 करोड़ लागत की 1.2 किमी लंबी सुरंग के के निर्माण का प्रस्ताव को भी हरी झंडी का इंतजार है। इसके अलावा प्रोटेक्शन कार्य, छोटे व बड़े पुलों के निर्माण से जुड़े प्रस्तावों को भी केंद्र से हरी झंडी मिलनी है।
एनएच के छह कार्यों के लिए मिली मंजूरी
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एनएच के छह प्रस्तावों को अभी तक मंजूरी दी है। करीब 147.69 करोड़ लागत के इन प्रस्तावों डोईवाला डिवीजन में 6.74 करोड़ के एक कार्य, 8.50 करोड़ लागत के एनएच 334ए में पुरकाजी-लक्सर हरिद्वार में 40 मीटर स्पान पुल व एनएच 507 में 50 लाख लागत के तीन कार्यों को मंजूरी मिल चुकी है।
इसके अलावा बारकोट में ही एनएच 94 पर ओजेरी में भूस्खलन क्षेत्र में डेढ़ किमी सुरंग निर्माण का होना है। इसकी कंसलटेंसी सर्विस के लिए केंद्र 1.44 करोड़ मंजूर किए हैं। रानीखेत में एनएच 309बी में 44 किमी सड़क के सुधारीकरण के लिए 48.19 करोड़ की स्वीकृति हुई है। श्रीनगर में एनएच 119 पर 32 किमी मार्ग के सुधारीकरण के लिए भी मं्रालय ने 82.32 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
बाकी प्रस्तावों की मंजूरी के लिए सरकार पर दबाव
चुनावी साल में राज्य सरकार पर ज्यादा से ज्यादा प्रस्ताव केंद्र से मंजूर कराने का है। राष्ट्रीय राजमार्गों की प्रस्तावित योजनाओं को मंजूरी दिलाने के लिए राज्य सरकार की ओर से मजबूत पैरवी होगी। इसके लिए शासन के उच्चाधिकारियों के साथ ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जिनके पास लोक निर्माण विभाग भी है, पैरवी कर रहे हैं।
उनका पिछले दिनों केंद्र में सड़क व अन्य विभागीय योजनाओं के लिए केंद्रीय मंत्रियों से मिलने का कार्यक्रम था। लेकिन कोरोना संक्रमित होने के कारण दौरा नहीं हो पाया। माना जा रहा है कि अब स्वस्थ होने के बाद मुख्यमंत्री दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर सकते हैं।
इस वित्तीय वर्ष के लिए 2362 करोड़ के 43 प्रस्ताव केंद्र को भेजे गए हैं। कुछ प्रस्ताव इससे अलग भी मंत्रालय गए हैं। समय-समय पर प्रस्तावों को मंजूरी प्राप्त हो रही है। अब तक छह प्रस्तावों को मंजूरी मिल चुकी है। 31 मार्च तक कुछ और प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
- एसके बिरला, मुख्य अभियंता, लोनिवि एनएच