अर्द्धसैनिक बल के अधिकारियों की जरूरत ही क्या
अर्द्धसैनिक बलों के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर किसी खास उद्देश्य के लिए बुलाया जाता है। मसलन, यदि आतंकवाद का माहौल हो या फिर कोई और जरूरत, लेकिन यहां पर ऐसा कुछ नहीं है। प्रदेश पुलिस का भीड़ नियंत्रण में देश-दुनिया में नाम है। कुंभ, कांवड़, हर साल होने वाली यात्राओं में पुलिस इस बात का लोहा हर साल मनवाती है।
कानून व्यवस्था पर भी पड़ेगा असर
इससे कानून व्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। इसका कारण है कि प्रदेश की पुलिस जनता के बीच रहकर काम करती है। उन्हें प्रशिक्षण भी इसी बात का दिया जाता है, जबकि अर्द्धसैनिक बलों के पास ऐसा कोई अनुभव नहीं होता। यदि उन्हें जिलों में कोई जिम्मेदारी दी जाती है तो कानून व्यवस्था के लिए किए जाने वाले काम प्रभावित होंगे।
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विरोध में पीपीएस एसोसिएशन ने डीजीपी को दिया ज्ञापन
केंद्रीय पुलिस बलों के उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति में आने के विरोध में पीपीएस एसोसिएशन ने डीजीपी अशोक कुमार को ज्ञापन दिया। पीपीएस अधिकारियों ने कहा, प्रदेश में प्रांतीय पुलिस अधिकारियों की कोई कमी नहीं है। ऐसे में केंद्रीय बलों से अधिकारियों का आने का कोई तर्क नहीं है। यहां उनकी जरूरत का कोई काम भी नहीं है। इससे राज्य कार्य की प्रतिकूल छवि बन जाने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। डीजीपी से मिलने वालों में पीपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष एएसपी सुरजीत पंवार, एएसपी प्रमोद कुमार, एएसपी शाहजहां अंसारी, एएसपी चक्रधर अंथवाल, एएसपी प्रकाश चंद्र आर्य आदि थे।