फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड: प्रतिनियुक्ति पर प्रदेश आना चाह रहे 18-20 पुलिस अधिकारी, एएसपी तक के अफसरों ने दिए आवेदन

Sat, 16 Sep 2023 04:56 PM IST
रेनू सकलानी रुद्रेश कुमार, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून

सार

केंद्रीय बलों से इंस्पेक्टर से लेकर एएसपी रैंक के अफसरों ने उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति की मांग की है। इनके आवेदन पर प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इस तरह से प्रतिनियुक्ति पर अफसरों को लेने वाला उत्तराखंड पहला राज्य है, जबकि यह उत्तराखंड प्रादेशिक पुलिस सेवा की नियमावली के खिलाफ है।
विज्ञापन
मीटिंग ( प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अर्द्धसैनिक बलों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस विभाग से संबंधित 18 से 20 पुलिस अधिकारी उत्तराखंड प्रतिनियुक्ति पर आने के लिए आवेदन किया है। इनके आवेदन भी शासन के पास पहुंच गए हैं। इससे स्थानीय अफसरों में हड़कंप मचा है।

इस मामले में पीपीएस एसोसिएशन मुख्यालय के माध्यम से शासन से भी वार्ता की तैयारी में है। केंद्रीय बलों से इंस्पेक्टर से लेकर एएसपी रैंक के अफसरों ने उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति की मांग की है। इनके आवेदन पर प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इस तरह से प्रतिनियुक्ति पर अफसरों को लेने वाला उत्तराखंड पहला राज्य है, जबकि यह उत्तराखंड प्रादेशिक पुलिस सेवा की नियमावली के खिलाफ है।

प्रदेश पुलिस सेवा में भर्ती अफसरों के हितों का भी हनन

विज्ञापन

प्रादेशिक पुलिस का लगभग 150 अधिकारियों का ढांचा है। इन पदों को सीधी भर्ती और प्रमोशन पर ही भरा जा सकता है। इसमें प्रतिनियुक्ति का कोई विकल्प ही नहीं है। बावजूद केंद्र के इन अफसरों के आवेदन लिए जा रहे हैं। यदि ऐसा हुआ तो प्रदेश पुलिस सेवा में भर्ती अफसरों के हितों का भी हनन होगा, साथ ही यहां के अफसरों की सेवा पर भी असर पड़ेगा।

मसलन, यदि कोई डीएसपी केंद्र से प्रतिनियुक्ति पर आता है, तो उसे किसी जिले में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तो दी जाएगी। इससे मूल कैडर के अधिकारी को या तो हटना होगा या फिर उसे पोस्टिंग के लिए इंतजार करना होगा। इसके साथ-साथ कई और भी ऐसी व्यवस्थाएं हैं, जो इस फैसले से प्रभावित होंगी। इन आवेदनों से इंस्पेक्टर से लेकर पीपीएस अधिकारियों में भारी नाराजगी है।

Trending Videos
विज्ञापन

अर्द्धसैनिक बल के अधिकारियों की जरूरत ही क्या

अर्द्धसैनिक बलों के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर किसी खास उद्देश्य के लिए बुलाया जाता है। मसलन, यदि आतंकवाद का माहौल हो या फिर कोई और जरूरत, लेकिन यहां पर ऐसा कुछ नहीं है। प्रदेश पुलिस का भीड़ नियंत्रण में देश-दुनिया में नाम है। कुंभ, कांवड़, हर साल होने वाली यात्राओं में पुलिस इस बात का लोहा हर साल मनवाती है।

कानून व्यवस्था पर भी पड़ेगा असर

इससे कानून व्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। इसका कारण है कि प्रदेश की पुलिस जनता के बीच रहकर काम करती है। उन्हें प्रशिक्षण भी इसी बात का दिया जाता है, जबकि अर्द्धसैनिक बलों के पास ऐसा कोई अनुभव नहीं होता। यदि उन्हें जिलों में कोई जिम्मेदारी दी जाती है तो कानून व्यवस्था के लिए किए जाने वाले काम प्रभावित होंगे।

ये भी पढ़ें...टिहरी:  चंबा-मसूरी मार्ग पर मैक्स से भिड़ी पर्यटकों की कार खाई में गिरी, चालक की मौत, तीन घायल एम्स रेफर

विरोध में पीपीएस एसोसिएशन ने डीजीपी को दिया ज्ञापन

केंद्रीय पुलिस बलों के उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति में आने के विरोध में पीपीएस एसोसिएशन ने डीजीपी अशोक कुमार को ज्ञापन दिया। पीपीएस अधिकारियों ने कहा, प्रदेश में प्रांतीय पुलिस अधिकारियों की कोई कमी नहीं है। ऐसे में केंद्रीय बलों से अधिकारियों का आने का कोई तर्क नहीं है। यहां उनकी जरूरत का कोई काम भी नहीं है। इससे राज्य कार्य की प्रतिकूल छवि बन जाने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। डीजीपी से मिलने वालों में पीपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष एएसपी सुरजीत पंवार, एएसपी प्रमोद कुमार, एएसपी शाहजहां अंसारी, एएसपी चक्रधर अंथवाल, एएसपी प्रकाश चंद्र आर्य आदि थे।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें