भारतीय जनता पार्टी की एक आम कार्यकर्ता से लेकर उत्तराखंड का राज्यपाल बनने तक के सफर में बेबी रानी मौर्य तमाम उतार चढ़ाव देखे हैं। पहले चुनाव में मेयर के पद तक पहुंची तो बाद में विधायक का चुनाव हार गईं लेकिन पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा ने आज उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। बेबीरानी मौर्य के ससुर एमडी मौर्य आईपीएस अधिकारी थे। पति प्रदीप कुमार मौर्य बैंक के अधिकारी रहे। परिवार में राजनीतिक माहौल नहीं था।
सास कमला मौर्य बताती हैं कि बेबीरानी मौर्य ने डरते-डरते राजनीति में आने के लिए इजाजत मांगी थी। ससुर ने इजाजत दी तो भाजपा ज्वाइन कर ली। पार्टी में आने के कुछ ही दिनों बाद 1995 में उन्होंने मेयर जैसा अहम चुनाव लड़ाया। जनता ने उनका साथ दिया और वे मेयर चुनी गईं। 2000 तक वे आगरा की मेयर रहीं। वह शहर की पहली महिला मेयर थीं।
1997 में वे राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा की कोषाध्यक्ष रहीं। वर्तमान में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तब राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा के अध्यक्ष रहे। 2001 में उन्हें प्रदेश सामाजिक कल्याण बोर्ड सदस्य बनाया गया। 2002 में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य बनीं। इसके बाद पार्टी ने 2007 में एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया लेकिन बसपा उम्मीदवार नारायण सिंह सुमन ने उन्हें नजदीकी अंतर से हरा दिया। 2013 से 2015 तक संगठन में उन्होंने प्रदेश मंत्री का दायित्व संभाला। वर्तमान में बेबीरानी मौर्य राष्ट्रीय परिषद एवं प्रदेश कार्य समिति की सदस्य हैं। बेबीरानी मौर्य पार्टी का शालीन चेहरा है। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा का उन्हें प्रतिफल मिला है। इसके साथ ही आलाकमान ने पार्टी का दलित चेहरा और महिला होने के नाते ही उन्हें दायित्व सौंपा है।
एक नजर...
- सामाजिक कार्यों के लिए 1996 में समाज रत्न से सम्मानित किया गया
- 1997 में उत्तर प्रदेश समाज रत्न सम्मानित किया गया
- 1998 में नारी रत्न से सम्मानित किया गया
- 18 वर्ष से नव चेनता जागृति संस्था के माध्यम से दलित एवं पिछड़ी महिला के लिए कार्य किया
- बच्चियों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना और सेवा भारती के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम
उत्तराखंड राज्यपाल केके पॉल
राज्यपाल की भूमिका में डॉ. केके पॉल का पांच साल का कार्यकाल आठ जुलाई को पूरा हो चुका है। मेघालय के राज्यपाल के तौर पर उनकी नियुक्ति के आदेश एक जुलाई, 2013 को हुए थे।
उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. केके पॉल की विदाई का वक्त मुकर्रर हो गया है। भाजपा नेत्री रहीं बेबी रानी मौर्य उनकी जगह राज्यपाल की जिम्मेदारी संभालेंगी। मौर्य का राजभवन में आगमन होगा और केके पॉल रुख्सत होंगे। उनके उत्तराखंड में तीन साल सात महीने के कार्यकाल के दौरान हरीश रावत सरकार के सियासी संकटका कालखंड चर्चाओं में रहा। इस अवधि में वह भाजपा के निशाने पर रहे।
नौ कांग्रेस विधायकों की बगावत से अल्पमत में आई कांग्रेस सरकार को लेकर चले गतिरोध के दौरान सियासी दलों ने राजभवन की भूमिका को अपने-अपने हिसाब से परिभाषित किया था। फिर भी राज्यपाल के तौर डॉ. पाल के खाते में बहुत कुछ ऐसा है, जिसके लिए वे याद किए जाएंगे। उन्होंने उच्च शिक्षा के सुधार और मेधावी शिक्षकों, छात्रों के सम्मान की नई परंपरा शुरू की।
डॉ. केके पॉल एक जुलाई 2013 में मेघालय के राज्यपाल बने थे। पिछले पांच साल के दौरान वे नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम के राज्यपाल रहे और फिर उन्हें उत्तराखंड की जिम्मेदारी सौंपी गई । उन्होंने जनवरी 2015 को उत्तराखंड के छठे राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर उनके कार्यकाल के तीन साल पांच महीने पूरे हुए। पिछले काफी समय से उनकी विदाई की चर्चाएं हवाओं में तैर रही थी।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर उत्तराखंड पधारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजभवन का आतिथ्य ग्रहण करने के बाद ये अटकलें थीं कि शायद पॉल की विदाई न हों। लेकिन भाजपा नेत्री बेबी रानी मौर्या को राज्यपाल बनाने के साथ ही पॉल की विदाई को लेकर बना सस्पेंस भी खत्म हो गया है। अब नए राज्यपाल के शपथग्रहण के साथ ही पॉल राजभवन से विदा हो जाएंगे।
राज्यपाल डॉ. केके पॉल से पहले डॉ. अजीज कुरैशी, मारग्रेट आल्वा, बीएल जोशी, सुदर्शन अग्रवाल और सुरजीत सिंह बरनाला उत्तराखंड के राज्यपाल रहे हैं।
18 साल पहले अस्तित्व में आए इस उत्तराखंड राज्य को एक बार फिर से सियासी पृष्ठभूमि वाले राज्यपाल मिलने जा रहे हैं।
राज्य के पहले राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला कांग्रेस सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे थे। चौथे राज्यपाल के रूप में शपथ लेने वाली मारग्रेट अल्वा भी केंद्र की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहीं थीं। पांचवे राज्यपाल रहे अजीज कुरैशी भी कांग्रेसी पृष्ठभूमि के ही थे। केंद्र की तत्कालीन भाजपा सरकार ने सबसे पहले एक ब्यूरोक्रेट सुदर्शन अग्रवाल को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया था।
वे राज्यसभा में बतौर महासचिव काम कर चुके थे। इसके बाद 2007 में केंद्र की कांग्रेसी सरकार ने भी पूर्व ब्यूरोक्रेट बीएल जोशी को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया था। 2015 में केंद्र सरकार ने एक बार फिर से ब्यूरोक्रेसी पृष्ठभूमि के डॉ. केके पॉल को राज्यपाल बनाया था। इस मर्तबा केंद्र की भाजपा सरकार ने एक बार फिर से सियासी बैकग्राउंड वाली बेबी रानी मौर्य को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नामित किया है।