उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने लिए खास चुनौती नहीं मान रही है। कांग्रेस ने फिलहाल राजनीतिक अस्थिरता के मुद्दे पर ही कायम रहना तय किया है।
कांग्रेस में इस समय स्थानीय चेहरे के आधार पर चुनाव लड़े जाने को लेकर मंथन है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत इसकी खुलकर पैरवी कर रहे हैं। दूसरी ओर, तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बना कर भाजपा ने यह जाहिर कर दिया है कि वह तीरथ सिंह रावत को आगे कर चुनाव लड़ेगी। ठीक इसी बात को कांग्रेस अपने लिए मुफीद भी मान रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा के नए मुख्यमंत्री को अपनी तरह से चुनाव लड़ना होगा और इससे कांग्रेस को चुनावी रणनीति बनाने में आसानी होगी।
रणनीतिक रूप से कांग्रेस ने भाजपा पर राजनीतिक अस्थिरता में प्रदेश को धकेलने के आरोप को ही जोर शोर से उठाने का फैसला किया है। नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री या मंत्री बदलने से भाजपा की नीति में बदलाव नहीं होने जा रहा है। भाजपा ने लोगों पर महंगाई, बेरोजगारी, कुशासन थोपा है। नए मुख्यमंत्री से कम ही उम्मीद है कि वे इन मुद्दों पर कोई ठोस पहल करेंगे।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भला और कड़क बताकर तीरथ के सामने चुनौती पेश करने की शुरूआत तो कर भी दी है। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश भी कह रही हैं कि चेहरा बदलने से कुछ नहीं होता। तीरथ चौबट्टाखाल के विधायक रह चुके हैं और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहने के कारण उनकी कार्यशैली से कांग्रेस अच्छी तरह से वाकिफ है।
नए मुख्यमंत्री को बधाई। भाजपा ने उत्तराखंड पर राजनीतिक अस्थिरता थोपी है। इसका शिकार भले और कड़क व्यक्ति को होना पड़ा है।
-हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड
भाजपा ने सिर्फ मुख्यमंत्री का चेहरा बदला है। इससे कुछ होने वाला नहीं है। भाजपा ने पिछले चार साल में कुछ नहीं किया और प्रदेश को खासा नुकसान पहुंचाया। यह साफ हो गया है कि 2022 में कांग्रेस ही सत्ता में आएगी।
-इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष उत्तराखंड
बेशक भाजपा ने मुख्यमंत्री बदल दिया हो, लेकिन मूल सवाल अपनी जगह है। चार साल में प्रदेश को चौतरफा नुकसान हुआ है। अब भाजपा उसकी जवाबदेही स्वीकार करेगी। कांग्रेस का विरोध कायम है।
-प्रीतम सिंह, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष
मुझे उम्मीद है कि नए सीएम के रूप में तीरथ सिंह रावत प्रदेश के लोगों की भावनाओं को समझेंगे और प्रदेश में वनाधिकार कानून को लागू करेंगे। वनाधिकार आंदोलन के तहत सत्ता पक्ष से लगातार यह मांग की भी जाती रही है।
-किशोर उपाध्याय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस