ट्रैक को नए सिरे से बनाना ही अंतिम विकल्प बचा था
पूरे ट्रैक पर नमी उभरने लगी थी, जिससे फिसलन बनती। वैसे भी 2013 में बने सिंथेटिक ट्रैक की मियाद 2019 में ही पूरी हो चुकी थी। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए ट्रैक को नए सिरे से बनाना ही अंतिम विकल्प बचा था।
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जून माह में एक केंद्रीय टीम ने ट्रैक का निरीक्षण किया था। टीम ने ट्रैक को फिर से बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन खेल तैयारियों के बीच असमंजस की स्थिति रही। ऐसा सुझाव भी आया कि मरम्मत के जरिये ट्रैक को सही किया जा सकता है। जब डीओसी ने ट्रैक को रिजेक्ट कर दिया तो फिर से निर्माण कार्य किया जा रहा है। इसकी वजह से खेल में बाधा नहीं आएगी। मैं खुद ट्रैक का निरीक्षण कर रहा हूं। 25 दिसंबर तक नया ट्रैक बन जाएगा, जिसका लाभ बाद में भी खिलाड़ियों को मिलता रहेगा। - अमित सिन्हा, विशेष प्रमुख सचिव (खेल)