उत्तराखंड की विकास योजनाओं के लिए अधिक धन उपलब्ध कराने पर नाबार्ड ने सहमति जता दी है। नाबार्ड ने यह भी कहा है कि राज्य सरकार की ओर से आग्रह किया गया तो सहकारी बैंकों की लघु ऋण सीमा 750 करोड़ रुपये से अधिक की जा सकती है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और नाबार्ड के चैयरमैन जीआर चिंतला की मौजूदगी में बुधवार को हुई बैठक में चिंतला ने कहा कि सिंचाई योजनाओं का काम तेज करने के लिए प्रदेश सरकार को अधिक मदद दी जाएगी।
बैठक में यह भी उभर कर सामने आया कि पर्वतीय राज्यों और क्षेत्रों के लिए नाबार्ड सहकारी बैंकों को एक हजार करोड़ तक का लोन मात्र 2.9 प्रतिशत ब्याज दर पर दे रहा है। चिंतला ने कहा कि इस लोन की सीमा भी बढ़ाई जा रही है। वहीं, नाबार्ड ने सहकारिता और कृषि क्षेत्र के जरिये प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों को अधिक धन उपलब्ध कराने पर भी सहमति दे दी है। बैठक में सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत, सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज, मुख्य सचिव ओम प्रकाश उपस्थित रहे।
ग्रोथ सेंटरों के लिए मांगी सहायता
सीएम ने कहा कि प्रदेश में 104 ग्रोथ सेंटर स्थापित किए गए हैं और वे करीब छह करोड़ का व्यवसाय कर रहे हैं। नाबार्ड इन सेंटरों को गतिविधियां बढ़ाने के लिए मदद दे सकता है।
कृषि मंत्री के प्रस्ताव पर सहमति
कृषि मंत्री ने खेती में मशीनीकरण बढ़ाने के लिए जारी योजनाओं में गैप फंडिंग की मांग की। कृषि मंत्री ने कहा कि इन योजनाओं में किसानों को करीब 70 प्रतिशत सहायता दी जा रही है। नाबार्ड ने शेष 30 में से 20 प्रतिशत की गैप फंडिंग पर सहमति जताई। कृषि मंत्री ने महिलाओं के लिए रिवाल्विंग फंड का आग्रह किया। चेयरमैन ने कहा कि आजीविका योजनाओं के जरिये यह मदद की जा सकती है।
नाबार्ड की ओर से इन पर भी की जा सकती है मदद
-सहकारी बैंक के लिए लघुु ऋण सीमा 750 करोड़ रुपये है। यह और बढ़ाई जा सकती है।
-एम पैक्स योजना के तहत नाबार्ड प्रति पैक्स दो करोड़ रुपये दे रहा है। प्रदेश में 104 समितियों को चिह्नित किया गया है।
-1200 करोड़ रुपये की सौंग परियोजना में नाबार्ड की ओर से धन उपलब्ध कराया जा सकता है।