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5 साल में उत्तराखंड के 12,747 युवाओं को मिला रोजगार, निजी क्षेत्र में अब भी पतली है हालत

Thu, 06 Dec 2018 08:33 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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हरक सिंह रावत - फोटो : ANI
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उत्तराखंड विधानसभा में प्रश्न काल के दौरान वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने सदन को बताया कि श्रम मंत्री ने सदन को बताया कि 2013 से 2017 तक पांच सालों में राज्य के सेवा योजन कार्यालयों में 9,24,511 बेरोजगारों का पंजीकरण किया गया है। इनमें से 12,747 बेरोजगारों को रोजगार दिया गया है।

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वहीं, विधायक संजीव आर्य के एक पूरक सवाल पर श्रम मंत्री ने स्वीकार किया कि निजी क्षेत्र में युवाओं को कुछ समय के लिए ही रोजगार मिल पा रहा है। अब सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि एक बार किसी को नौकरी मिलने के बाद उसका रोजगार समाप्त न हो। सरकार निजी क्षेत्रों से नौकरी का अनुबंध कराएगी और इसका पूरी तरह से पालन करने को कहेगी। अगर कोई अनुबंध तोड़ता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि राज्य के सभी नेशनल पार्क और सेंक्चुरीज में व्यवस्थाओं के लिए सरकार एक शीर्ष बोर्ड का गठन करेगी। इसी तरह रोजगार विषयक सवालों का जवाब देते हुए श्रम मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि सरकारी महकमों में भर्ती के लिए सरकार एक राज्य स्तरीय आउट सोर्स एजेंसी के गठन पर गंभीरता से विचार कर रही है।

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पीपीपी मोड में नहीं जाएंगे आयुर्वेद चिकित्सालय

प्रश्न काल के दौरान वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने सदन को बताया कि राज्य के सभी नेशनल पार्क और सेंक्चुरीज में व्यवस्थाओं के लिए सरकार जल्द की एक शीर्ष बोर्ड (एपेक्स बोर्ड) का गठन करने वाली है। अभी तक इन पार्क और सेंचुरीज से होने वाली आय का महज 20 फीसदी पैसा ही इनकी व्यवस्थाओं पर खर्च किया जाता है। अब कोर्ट के फैसले के अनुसार आय का पूरा पैसा इन्हीं पार्क और सेंचुरीज पर खर्च किया जाएगा। इससे मूलभूत इन स्थानों पर सुविधाओं में और इजाफा होगा।
 
विधायक देशराज कर्णवाल और विधायक सुरेश राठौर के सवालों और पूरक सवालों का श्रम मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने जवाब दिया कि सेवा योजन दफ्तरों का अब ज्यादा उपयोग नहीं रह गया है। उपनल से होने वाली भर्तियों के बारे में कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वहां से केवल पूर्व सैनिकों को ही रोजगार दिया जाएगा। ऐसे में सरकार अब सरकारी दफ्तरों में भर्ती के लिए एक राज्य स्तरीय आउटसोर्स एजेंसी के गठन पर गंभीरता से विचार कर रही है।

विधायक राम सिंह कैड़ा के सवाल पर आए अनुपूरक सवालों पर आयुष मंत्री ने सदन को आश्वासन दिया कि राज्य के आयुर्वेदिक चिकित्सालयों को पीपीपी मोड में चलाने की कोई योजना नहीं है और न ही सरकार किसी चिकित्सालय को पीपीपी मोड में देने जा रही है।

ईको टूरिज्म कॉरपोरेशन का गठन

विधायक देशराज कर्णवाल के सवाल पर वन मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड ईको टूरिज्म कॉरपोरेशन का गठन करके प्रबंध निदेशक की नियुक्ति कर दी गई है। ईको टूरिज्म की गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य स्तरीय बर्ड फेस्टिवल और नेचर फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। विभागीय कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की दक्षता के विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। 

औद्योगिक इकाइयों में 21 श्रमिकों की मौत

विधायक देशराज के सवाल पर श्रम मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य की औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों में से वर्ष 2017-18 में 15 श्रमिकों की मृत्यु हुई और 46 घायल हुए हैं। चालू वित्त वर्ष में (31 अक्टूबर तक) छह श्रमिकों की मृत्यु हुई और 29 घायल हुए हैं। इन श्रमिकों को हित लाभ देने की समस्त कार्यवाही राज्य बीमा निगम और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से की जाती है।
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राज्य में पौने दो लाख परिवारों के पास नहीं आवास

विधायक देशराज के सवाल पर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने सदन को बताया कि ग्राम्य विकास विभाग के सर्वे-2011 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 75,806 परिवार और शहरी क्षेत्र में 1,04,200 परिवार आवास विहीन हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों को केंद्र सरकार के कोई निर्णय लेने पर ही लाभांवित करने की कार्यवाही की जा सकती है जबकि शहरी क्षेत्र के परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी क्षेत्र) के तहत 2022 तक आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

टिहरी में पार्किंग को 311 लाख की डीपीआर तैयार
विधायक धन सिंह नेगी के सवाल पर शहरी विकास मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री ने नई टिहरी नगर पालिका क्षेत्र में पार्किंग की घोषणा की है। इस पर आवास विकास विभाग काम कर रहा है। पार्किंग व्यवस्था के लिए 311.14 लाख की डीपीआर तैयार कर ली गई है।

कांवड मेले के लिए जारी किए 50 लाख रुपये
विधायक सुरेश राठौर के सवाल पर शहरी विकास मंत्री ने बताया कि 2017 के कांवड मेले में 3,70,32,000 और 2018 में 3,76,88,00 कांवड़िए हरिद्वार में आए। मेले की व्यवस्थाओं के लिए दोनों वर्षों में 50-50 लाख रुपये जारी किए गए हैं।
 
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