टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग खुलने का इंतजार लंबा हो रहा है। स्वांला मंदिर के नजदीक ऊंची पहाड़ी दरकने से सोमवार से बंद सड़क के 60 मीटर हिस्से से मलबा हटाना चुनौती बन रहा है। दो दिन में इस स्थान से 140 मीटर हिस्से से मलबे को हटाया जा चुका है, लेकिन हल्की बारिश और बीच-बीच में मलबा गिरने से काम में अवरोध भी हो रहा है। बुधवार को मलबा हटाने में लगे एक लोडर वाहन पर पत्थर गिरा, जिसमें ऑपरेटर बाल-बाल बच गया।
डीएम विनीत तोमर का कहना है कि मलबे की स्थिति को देखते हुए सड़क खुलने में एक से दो दिन और लग सकते हैं। टनकपुर और चंपावत के बीच वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोकी गई है। इस मार्ग पर रीठा साहिब-सूखीढांग होकर वाहनों का आवागमन हो रहा है। इसमें 75 किमी के बजाय 135 किमी का फासला तय करना पड़ रहा है जबकि हल्द्वानी की ओर जाने वाले वाहनों को देवीधुरा होकर भेजा जा रहा है। बुधवार को देवीधुरा होकर छह (दिल्ली, देहरादून के लिए एक-एक और हल्द्वानी के लिए चार) बसों को चलाया गया।
टनकपुर से लोहाघाट डिपो की एक-एक बस गुरुग्राम, दिल्ली, देहरादून और बरेली के लिए चलाई गई। एनएच खंड के ईई एलडी मथेला सहित इंजीनियरों और शिवालया कंपनी की टीम पांच मशीनों के जरिये मलबा हटाने में जुटी है। दो दिन में सड़क के 200 मीटर हिस्से में से 140 मीटर में से मलबा साफ कर लिया गया है। बाकी जगह से मलबे को हटाने में बारिश और धुंधनुमा मौसम समेत पहाड़ी से गिर रहे पत्थर आड़े आ रहे हैं। वहीं बुधवार को इंजीनियरों ने पिछले महीने भूस्खलन से खतरे की जद में आए स्वांला गांव के इलाके का भी मुआयना किया।
कुमाऊं की लाइफ लाइन ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग में वीरभट्टी के पास मंगलवार की दोपहर 2 बजे से बंद मार्ग को बुधवार को 20 घंटे बाद यातायात के लिए खोल दिया गया। मार्ग के खुलने से कुमाऊं और गढ़वाल के वाहन चालकों और यात्रियों ने राहत की सांस ली।
बीते शुक्रवार से बंद हाईवे को मंगलवार को खोल दिया गया था लेकिन दोपहर बाद दोबारा आए मलबे से यातायात फिर ठप हो गया। इसे बुधवार सुबह 10 बजे सभी वाहनों के लिए खोल दिया गया। इस हाईवे के बंद होने से कुमाऊं की हर प्रकार की गतिविधियां चरमरा गईं थीं।
केंद्रीय राज्यमंत्री अजय भट्ट ने भी डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल को हाईवे के सुचारु करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभाग अन्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा सक्रिय नजर आया। फिलहाल यातायात सुचारु है। बुधवार को करीब 300 से अधिक बड़े ट्रकों समेत बड़ी संख्या में अन्य वाहनों ने हाईवे से आवाजाही की। हालांकि, पहाड़ी से गिरता मलबा लगातार वाहन चालकों के लिए हादसे की वजह बना हुआ है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन को आपदाओं की घटनाओं की सूचनाएं उन्हें तत्काल देने के निर्देश दिए। उन्होंने सूचनाओं को लेकर उच्चाधिकारियों व आपदा प्रबंधन के कार्यों से जुड़े अधिकारियों का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाने को भी कहा।
वह आपदा प्रबंधन परिचालन केंद्र में अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। बुधवार को प्रदेश भर में भारी बारिश और आपदा की घटनाओं की सूचना मिलने के बाद मुख्यमंत्री राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिवालय स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने तत्काल प्रदेश भर में आपदाओं की घटनाओं के बारे में जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग की सड़क बंद होने की स्थिति में जखोली एवं नारायण बगड़ में तैनात जेसीबी के चालकों से भी दूरभाष पर वार्ता की। उन्होंने आपदा प्रबंधन को निर्देश दिए कि आपदा से संबंधित सूचनाओं से उन्हें भी तत्काल अवगत कराया जाए। साथ ही शासन के उच्चाधिकारियों एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों का एक वाट्सएप ग्रुप भी बनाए जाने को कहा ताकि आपदा राहत कार्यों में तेजी से कार्रवाई की जा सके। उन्होंने जिलाधिकारियों से भी निरंतर समन्वय बनाए जाने को कहा। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास आपदा के दौरान लोगों को तुरंत राहत पहुंचाने का है। इस पर आपसी समन्वय एवं तत्परता के साथ ध्यान दिया जाए। इस पर कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद भी मौजूद थे।
15 सितंबर तक सड़कों की स्थिति का करें आकलन
मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 सितंबर तक सभी सड़कों की स्थिति का भी आंकलन कर लिया जाए ताकि वर्षा समाप्त होते ही सड़कों की मरम्मत का कार्य बिना देरी किए शुरू किया जा सके। उन्होंने कंट्रोल रूम के टोल फ्री नंबर, लॉगबुक आदि का भी निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखी। सचिव आपदा प्रबंधन एसए मुरुगेशन ने मुख्यमंत्री को प्रदेश में आपदा की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 24 घंटे आपदा प्रबंधन केंद्र को संचालित किया जा रहा है। धारचूला एवं गौचर में एक-एक हेलीकॉप्टर आपदा राहत के लिए तैनात किया गया है।