भोजनावकाश के बाद शुरू हुई सदन की कार्यवाही में विपक्ष ने नारेबाजी जारी रखी और विधानसभा सचिव की मेज पलट दी। शोरगुल के बीच ही सरकार ने नौ विधेयक पटल पर रखे। 3.20 बजे विस अध्यक्ष ने चार बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। मंगलवार को पहले दिन हंगामे के चलते एक घंटा तीस मिनट सदन की कार्यवाही बाधित रही। पूरे दिन 01: 45 घंटे ही सदन चल पाया।
सदन में सदस्यों को अपनी बात को रखने का तरीका समझना चाहिए। तोड़फोड़ करना किसी भी तरह से उचित नहीं है। मेरा मानना है कि सदस्य अपनी बात रखें लेकिन सदन की गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए। विपक्ष जिस मुद्दे को 310 में लेकर आया, वह न्यायालय में विचाराधीन है जिससे उसे नियम 58 में स्वीकार नहीं किया गया।
-ऋतु खंडूड़ी भूषण, विधानसभा अध्यक्ष
सदन में विपक्ष ने कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दीं। विपक्ष कानून व्यवस्था पर चर्चा करने की बात कर रहा था लेकिन उसने खुद ही कानून तोड़ दिया। आज सदन में जो भी हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सदन में जनता के मुद्दों पर बात होनी चाहिए। हम सदन चलाना चाहते थे। प्रदेश के लोगों ने पहली बार यह कृत्य देखा।
- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
कांग्रेस को न्यायालय में विश्वास नहीं है। हमारी नियमावली में स्पष्ट है कि अगर कोई मामला न्यायालय में विचाराधीन है तो उस पर चर्चा नहीं की जा सकती है। पूरी सरकार, अधिकारी यहां जुटे हैं। आपदा के इस मुश्किल हालात में सबकी निगाहें सदन की कार्यवाही पर थीं, जो हुआ निंदनीय है। कांग्रेस सदन की कार्यवाही को चलने ही नहीं देना चाहती है।
- सुबोध उनियाल, संसदीय कार्यमंत्री
सदन को संचालित करने की जिम्मेदारी सरकार की है। पंचायत चुनाव में कानून व्यवस्था का जिस तरह से मजाक बनाया गया है उस पर विपक्ष सदन में चर्चा कर जवाब मांग रहा है। सरकार जवाब देने से बच रही है। हम चाहते हैं कि सदन चले लेकिन विपक्ष के सवालाें का जवाब न देकर सरकार खुद व्यवधान उत्पन्न कर रही है।
-यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष