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उत्तराखंड: मानसून ने बढ़ाई मुश्किल, गंगोत्री-यमुनोत्री मार्ग ले रहा परीक्षा, बदरीनाथ हाईवे पर कुछ राहत

Sat, 05 Sep 2026 01:00 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो/ संवाद न्यूज एजेंसी

सार

पहाड़ों में मानसून की बारिश ने इस बार भी आवाजाही की मुश्किलें बढ़ाईं, लेकिन हर मार्ग की तस्वीर एक जैसी नहीं रही। गंगोत्री-यमुनोत्री रूट पर लगातार भूस्खलन चुनौती बना रहा, जबकि बदरीनाथ हाईवे अपेक्षाकृत कम प्रभावित रहा।
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सड़कें खोलने में जुटी जेसीबी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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राज्य में इस बार भी मानसून में भूस्खलन, भूधंसाव के चलते मार्ग बंद होने और खुलने की स्थिति बनती रही। गंगोत्री, यमुनोत्री मार्ग पर हो रहा भूस्खलन करीब हर दिन मुसीबत बन रहा है। बदरीनाथ मार्ग की कुछ राहत की स्थिति रही है। अन्य वर्षों की तुलना में इस बार बदरीनाथ हाईवे 24 घंटे से अधिक समय तक बंद नहीं रहा।

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इसका मुख्य कारण भूस्खलन व भूधंसाव क्षेत्रों में ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत उपचार किया जाना माना जा रहा है। हालांकि ज्योतिर्मठ से मारवाड़ी के बीच हाईवे चौड़ीकरण कार्य न होने से तीर्थयात्रियों को जाम की परेशानी झेलनी पड़ी। वहीं, पिछली बार की तुलना में बारिश कम होना भी एक कारण माना जा रहा है।

गंगोत्री और यमुनोत्री हाईवे पर हो रहा भूस्खलन हर दिन बन रहा मुसीबत

उत्तरकाशी जिले के यमुनोत्री हाईवे पर पालीगाड से जानकीचट्टी तक हो रहे चौड़ीकरण के कार्यों में अनियंत्रित कटान व योजना के तहत कार्य न होने के कारण स्यानाचट्टी, रानाचट्टी और सिलाई बैंड में कई दिनों तक आवाजाही बंद होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं पहाड़ों से गिर रहे बोल्डरों से भी कई लोग घायल हुए। गंगोत्री हाईवे पर धरासू, भटवाड़ी सहित नालूपानी के भूस्खलन जोन परेशानी का सबब बने हुए हैं। भटवाड़ी से डबरानी में अचानक हो रहा भूस्खलन भी मुसीबत बना हुआ है। आपदा के बाद से डबरानी, सोनगाड और भटवाड़ी आदि क्षेत्रों में अभी तक सुरक्षात्मक कार्य नहीं हो पाए हैं।

भूस्खलन क्षेत्रों के उपचार से सुगम तो तंग जगहों पर झेलनी पड़ी परेशानी

इस बार बदरीनाथ हाईवे 24 घंटे से अधिक समय तक बंद नहीं रहा। इसका मुख्य कारण भूस्खलन व भूधंसाव क्षेत्रों में ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत उपचार किया गया है। हालांकि ज्योतिर्मठ से मारवाड़ी के बीच हाईवे चौड़ीकरण कार्य न होने से तीर्थयात्रियों को जाम से परेशानी उठानी पड़ी। इस बार बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर रही।

भूस्खलन की समस्या कम हुई

ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत हाईवे के संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों में किए गए उपचार कार्य से यात्रा के दौरान मार्ग पर आवागमन में बाधा में कमी आई। हाईवे पर क्षेत्रपाल और पागल नाला जैसे संवेदनशील स्थानों पर पहाड़ी व हाईवे के उपचार से भूस्खलन की समस्या काफी कम हुई है। लामबगड़ में मोटर पुल बनने से भी यात्रा सुचारु रही। हाईवे पर एनएचआईडीसीएल और बीआरओ की ओर से पर्याप्त मशीनरी व मैनपावर तैनात की गई। 27 अगस्त को हाथी पहाड़ के पास सड़क ध्वस्त होने के बावजूद करीब आठ घंटे में मलबा हटाकर यातायात सुचारु कर दिया गया।

तोताघाटी और सिंगटाली में रास्ता नहीं हुआ बंद

चारधाम मार्ग की शुरुआत ऋषिकेश से होती है। इस मार्ग पर ऋषिकेश- बदरीनाथ मार्ग पर पिछले वर्षों में तोताघाटी और सिंगटाली में भूस्खलन के कारण रास्ता बंद होने की अक्सर घटनाएं हुईं। मगर इस बार राहत रही है। इस सीजन में अभी तक यहां पर रास्ता बंद नहीं हुआ है।

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दो सौ से अधिक भूस्खलन जोन

राज्य में 17100 किमी सड़क का नेटवर्क है। लोक निर्माण विभाग ने मानसून से पहले लोनिवि, एनएच समेत अन्य संस्थाओं के अधीन सड़कों पर एक दो नहीं बल्कि 210 भूस्खलन जोन को चिह्नित किया था। इसके अलावा बारिश में नए भूस्खलन जोन भी बनते हैं। मार्ग को खोलने के लिए संसाधनों को जुटाने के साथ संवेदनशील जगहों पर तैनात किया गया। विभिन्न जगहों पर 589 जेसीबी, 73 पोकलेन को तैनात किया गया। इसके अलावा टिपर समेत अन्य वाहनों की व्यवस्था की गई। श्रमिकों को भी मार्ग खोलने के लिए तैनात किया गया।

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अब तक 1393 सड़क हुई बंद

लोक निर्माण विभाग के विभागाध्यक्ष राजेश चंद्र शर्मा बताते हैं कि पिछले साल की तुलना में इस बार सड़क बंद होने की स्थिति कम रही है। पिछले वर्ष तक अभी तक केवल लोनिवि की 2013 सड़क बंद हुई थीं, जबकि इस बार 1393 बार सड़क बंद होने के मामले सामने आए हैं। संवेदनशील जगहों पर जेसीबी समेत टीमों को तैनात किया गया है, कम से कम समय में मार्ग खुल जाएं, इसका प्रयास किया जा रहा है। एनएच के मुख्य अभियंता रणजीत सिंह रावत बताते हैं कि संवेदनशील जगहों पर जेसीबी को तैनात रखा गया है, मार्ग बंद होने के बाद जल्द खुल सके, यह कोशिश की जा रही।

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