भूस्खलन की समस्या कम हुई
ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत हाईवे के संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों में किए गए उपचार कार्य से यात्रा के दौरान मार्ग पर आवागमन में बाधा में कमी आई। हाईवे पर क्षेत्रपाल और पागल नाला जैसे संवेदनशील स्थानों पर पहाड़ी व हाईवे के उपचार से भूस्खलन की समस्या काफी कम हुई है। लामबगड़ में मोटर पुल बनने से भी यात्रा सुचारु रही। हाईवे पर एनएचआईडीसीएल और बीआरओ की ओर से पर्याप्त मशीनरी व मैनपावर तैनात की गई। 27 अगस्त को हाथी पहाड़ के पास सड़क ध्वस्त होने के बावजूद करीब आठ घंटे में मलबा हटाकर यातायात सुचारु कर दिया गया।
तोताघाटी और सिंगटाली में रास्ता नहीं हुआ बंद
चारधाम मार्ग की शुरुआत ऋषिकेश से होती है। इस मार्ग पर ऋषिकेश- बदरीनाथ मार्ग पर पिछले वर्षों में तोताघाटी और सिंगटाली में भूस्खलन के कारण रास्ता बंद होने की अक्सर घटनाएं हुईं। मगर इस बार राहत रही है। इस सीजन में अभी तक यहां पर रास्ता बंद नहीं हुआ है।
दो सौ से अधिक भूस्खलन जोन
राज्य में 17100 किमी सड़क का नेटवर्क है। लोक निर्माण विभाग ने मानसून से पहले लोनिवि, एनएच समेत अन्य संस्थाओं के अधीन सड़कों पर एक दो नहीं बल्कि 210 भूस्खलन जोन को चिह्नित किया था। इसके अलावा बारिश में नए भूस्खलन जोन भी बनते हैं। मार्ग को खोलने के लिए संसाधनों को जुटाने के साथ संवेदनशील जगहों पर तैनात किया गया। विभिन्न जगहों पर 589 जेसीबी, 73 पोकलेन को तैनात किया गया। इसके अलावा टिपर समेत अन्य वाहनों की व्यवस्था की गई। श्रमिकों को भी मार्ग खोलने के लिए तैनात किया गया।
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अब तक 1393 सड़क हुई बंद
लोक निर्माण विभाग के विभागाध्यक्ष राजेश चंद्र शर्मा बताते हैं कि पिछले साल की तुलना में इस बार सड़क बंद होने की स्थिति कम रही है। पिछले वर्ष तक अभी तक केवल लोनिवि की 2013 सड़क बंद हुई थीं, जबकि इस बार 1393 बार सड़क बंद होने के मामले सामने आए हैं। संवेदनशील जगहों पर जेसीबी समेत टीमों को तैनात किया गया है, कम से कम समय में मार्ग खुल जाएं, इसका प्रयास किया जा रहा है। एनएच के मुख्य अभियंता रणजीत सिंह रावत बताते हैं कि संवेदनशील जगहों पर जेसीबी को तैनात रखा गया है, मार्ग बंद होने के बाद जल्द खुल सके, यह कोशिश की जा रही।