मोदी मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार हो गया। उत्तराखंड के हाथ खाली रह गए। कम से कम एक मंत्री और बनाए जाने की उत्तराखंड अपेक्षा कर रहा था। खास तौर पर तब, जबकि देश के शीर्ष पदों पर उत्तराखंड के लोग चमक रहे हैं।
जिस राज्य ने अपने पांचों सांसद बीजेपी को दिए। 70 सदस्यों वाली विधानसभा में 57 विधायक बीजेपी के पहुंचा दिए हो, वहां पर अवाम की एक और मंत्री की अपेक्षा को कोई गैरवाजिब नहीं मान रहा था। इन स्थितियों के बीच, बीजेपी पर अब विरोधियों के हमले और बढ़ने तय है।
उत्तराखंड बीजेपी के पास रक्षात्मक होने के अलावा और कोई चारा नहीं है। हालांकि पार्टी दावा कर रही है कि कुछ ही महीनों में केंद्र सरकार ने विभिन्न प्रोजेक्टों में उत्तराखंड के लिए करीब 50 हजार करोड़ का बजट मंजूर कर दिया है। इसके बावजूद, केंद्रीय मंत्रिमंडल में उत्तराखंड की उपेक्षा का सवाल बड़ा बन रहा है।