प्रदेश में डबल इंजन की सरकार के मंत्री दिल्ली में इमदाद के लिए केंद्रीय मंत्रियों की परिक्रमा कर रहे हैं, लेकिन सरकारी महकमों का हाल इतना खराब है कि जो धन जारी हो चुका है, उसे भी कायदे से खर्च नहीं कर पा रहे हैं।
पिछले दिनों वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने केंद्रीय वित्तीय मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात कर विभिन्न केंद्रीय योजनाओं की अवशेष राशि के तौर पर 3435 करोड़ रुपये जारी करने की डिमांड की थी। इसके अलावा सरकार के मंत्री अपने विभागों से संबंधित केंद्रीय योजनाओं के मद में ज्यादा से ज्यादा बजट जारी करने के लिए दिल्ली दौड़ रहे हैं।
मगर तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि केंद्र इस वित्तीय वर्ष में विभिन्न योजनाओं में करीब 3291 करोड़ रुपये की राशि जारी की है, उसमें से विभाग अब तक 1368 करोड़ रुपये खर्च नहीं कर पाए हैं। सरकार के लिए चिंता की बात यह है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब मुश्किल से तीन माह का वक्त शेष है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुछ विभागों ने केंद्र पोषित योजनाओं में राज्य के हिस्से की पर्याप्त वित्तीय स्वीकृतियां जारी नहीं की है, जबकि सरकार ने इसका पहले से बजटीय प्रावधान कर रखा है।
विभागों की सुस्ती पर वित्त विभाग ने लिया संज्ञान
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विभागों की सुस्ती पर वित्त विभाग ने संज्ञान लिया है और सभी विभागों को शीघ्र वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों को पत्र लिखा है, जिसमें पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान भारत सरकार ने विभिन्न योजनाओं में करीब 3291 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। कोषागार से लगभग 2,368 करोड़ आवंटित किए जा चुके हैं। इनमें से भी विभागों ने महज करीब 20433 करोड़ रुपये ही खर्च किए हैं। खर्च की इस ढीली रिपोर्ट पर वित्त विभाग खेद जताया है और योजना के सापेक्ष विभागीय वित्तीय स्वीकृतियां तत्काल करने को कहा है। साथ ही धनराशि जारी होने में यदि कोई दिक्कत आती है, तो उसका तत्काल निराकरण करने का सुझाव भी दिया गया है।
ये है केंद्र पोषित योजना के खर्च का हाल
-7242 करोड़ का है बजटीय प्रावधान
-3292 करोड़ केंद्र ने नवंबर तक जारी किए
-2968 करोड़ सरकार के कोषागार से आवंटित
-2043 करोड़ विभाग अब तक खर्च कर पाएं हैं