इस दौरान चले सियासी उठक पटक के बीच रावत का एक स्टिंग ऑपरेशन एक निजी चैनल पर ऑन एयर हुआ। सत्ता बचाने के लिए हरीश रावत एक बिचौलिये से विधायकों की खरीद फरोख्त की कोशिश करते दिखे।
इस वीडियो में एक मंत्री हरक सिंह रावत की आवाज भी सुनाई दी थी। इस स्टिंग के सार्वजनिक होते ही सियासी हड़कंप मच गया। रावत अपनी सत्ता बचाने में तो कामयाब रहे, लेकिन मामले में सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर लिया।
इसके बाद हरीश रावत के करीबी विधायक मदन बिष्ट का स्टिंग सामने आया। बिष्ट पूर्व मंत्री हरक सिंह के बीच की सरकार बचाने को लेकर गोपनीय बातचीत ऑन एयर हो गई। रावत सरकार के स्टिंग का शोर थमा भी नहीं था कि उनके सचिव मोहम्मद शाहिद का पुराना स्टिंग गर्मा गया।
शाहिद पर आरोप है कि आबकारी नीति को लेकर कुछ डील कर रहे थे। इन स्टिंग ऑपरेशनों का सूत्रधार वही निजी चैनल है, जिसके सीईओ उमेश कुमार शर्मा को पुलिस ने रविवार को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया।
उमेश कुमार पर कई सवाल तब भी खड़े हुए थे। ताजा प्रकरण में पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार इस बार फिर उनके निशाने पर सीएम कार्यालय ही था। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत और उनके प्रमुख सचिव ओम प्रकाश के साथ मुख्य सचिव तक को खुफिया कैमरे में कैद करने की कोशिश थी।
इसके अलावा भी प्रदेश में कई स्टिंग गिरोह सक्रिय होने की चर्चा रही है। उगाही की मंशा से ‘स्टिंगबाज’ मंत्रियों, विधायकों और अफसरों को खुफिया कैमरे में कैद करने की कोशिश में रहते हैं। बसपा के एक विधायक भी इनके जाल में फंस चुके हैं।
केवल बड़े राजनेताओं को ही नहीं बल्कि छोटे अधिकारियों को फांसने का खेल भी प्रदेश में हो चुका है। सचिवालय के दो अधिकारी स्टिंग ऑपरेशन का शिकार हुए थे। इसके अलावा कई वीआईपी के स्टिंग प्रकरण केवल चर्चा तक सीमित रहे।