प्रदेश में अब तक मान्यता न लेने वाले मदरसों को शिक्षा विभाग ने आरटीई से थोड़ी राहत दी है। एक्ट के मुताबिक 31 अगस्त के बाद निजी स्कूलों की ऑनलाइन मान्यता के आवेदनों पर विचार न करने का आदेश जारी किया गया है, लेकिन मदरसों के मामले में ऐसा नहीं है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मदरसे पहले से चल रहे हैं, ऐसे में उनसे मान्यता के लिए आवेदन लिया जा सकता है।
प्रदेश में मदरसा बोर्ड से पंजीकृत 452 मदरसों में से कई मदरसों ने शिक्षा विभाग से मान्यता लेने से इनकार कर दिया है तो कई के मान्यता के लिए शिक्षा विभाग में आवेदन लंबित हैं। निजी स्कूलों की मान्यता की तर्ज पर मदरसों को मान्यता दी रही है। शिक्षा विभाग ने मान्यता के लिए एक आदेश जारी किया कि निजी स्कूलों की मान्यता के लिए एक अप्रैल से 31 जुलाई तक किए आवेदन पर निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।
जबकि एक अगस्त से 31 अगस्त तक विलंब शुल्क देना होगा। 31 अगस्त के बाद मान्यता के लिए किसी भी ऑनलाइन आवेदन पर विभाग की ओर से विचार नहीं किया जाएगा। शिक्षा विभाग के इस आदेश से मदरसों की मान्यता का मामला लटक गया था। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मदरसों को इस मामले में थोड़ी राहत दी गई है।
देहरादून के मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जयसवाल बताते हैं कि मदरसे पहले से चले से चल रहे हैं। उनके मामले में इस आदेश पर अमल नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मदरसों के निरीक्षण के बाद जिले में सात मदरसों को मान्यता दी गई है। जबकि कुछ अन्य के मामले विचाराधीन हैं।
शिक्षकों की दोहरी व्यवस्था बन रही बाधा
जमियत उलेमाए हिंद के जिला कोषाध्यक्ष अब्दुल सत्तार बताते हैं कि मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए मदरसा बोर्ड की डिग्री मान्य होती थी, लेकिन अब विद्यालयी शिक्षा में ऐसा नहीं है। इसके लिए डीएलएड, टीईटी व स्नातक किए शिक्षक चाहिए। धार्मिक और विद्यालयी शिक्षा के लिए अलग-अलग शिक्षकों की दोहरी व्यवस्था मान्यता में आड़े आ रही है। इसके अलावा कक्षा पांचवीं तक की मान्यता के लिए कम से कम पांच कक्षा कक्ष और एक अतिरिक्त कक्ष होना अनिवार्य है।
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मदरसों की मान्यता के लिए शिक्षक का टीईटी होना अनिवार्य है। छह से पांच तक के लिए टीईटी प्रथम और छह से आठवीं तक के लिए टीईटी दो उत्तीर्ण होना चाहिए, शिक्षक की शैक्षिक योग्यता में किसी तरह की छूट नहीं दी जा सकती। -गोविंद राम जयसवाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून