एक बहन ने भाई को मुकाम पर पहुंचाया, दूसरी का प्रयास नहीं आया काम
देशभर में इंडिया गठबंधन ने जहां सत्ता में पहुंचने के करीब सीटें हासिल करने में कामयाब रही। वहीं, उत्तराखंड की कुछ सीटों पर जीत के काफी करीब तक भी पहुंची। देशभर में पार्टी को जीत दिलाने के लिए पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी की बहन प्रियंका का प्रयास भी सफल रहा। भाई को मुकाम दिलाने में प्रियंका जैसी बहन ने पूरी ताकत से साथ दिया। वहीं, हरिद्वार सीट पर भाई को जीत दिलाने में बहन अनुपमा रावत असफल रहीं। हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट से विधायक अनुपमा ने भाजपा सरकारी की कैबिनेट में मंत्री रहे स्वामी यतीश्वरानंद को हराकर यह सीट हासिल की थी। भाई वीरेंद्र चुनाव मैदान में उतरे तो सफलता दिलाने में आखिरकार असफल रहीं।
हरिद्वार ग्रामीण सीट पर मतगणना की शुरुआत से लेकर ही कांग्रेस जीत दर्ज चुके भाजपा प्रत्याशी त्रिवेंद्र सिंह रावत से पीछे ही रही। हालत यह रही कि पहले चरण में जहां भाजपा प्रत्याशी को 418 वोट मिले वहीं विधायक बहन के इसी क्षेत्र में वीरेंद्र रावत को मात्र 181 वोट पर संतोष करना पड़ा। बूथ नंबर दो पर 334 वोट भाजपा तो 178 वोट कांग्रेस को मिले। बूथ नंबर 3 पर भाजपा को 463 वोट मिले, वहीं कांग्रेस को 261 वोट मिले। यही क्रम लगातार कई पोलिंग स्टेशन पर देखा गया।
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भाजपा प्रत्याशी इस विधानसभा में लगातार बढ़त बनाते रहे और विधायक बहन की मनुहार जनता ने नकार दिया। पोलिंग स्टेशन संख्या 11 पर 27 वोट 34 पर 29 वोट और पोलिंग स्टेशन 81 पर मात्र 12 वोट कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र रावत को मिले। कुछ पोलिंग स्टेशन हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र के ऐसे भी मिले पर जिस पर कांग्रेस प्रत्याशी विरेंद्र रावत को विधायक बहन अनुपमा रावत ने निर्दलीय के बराबर भी वोट दिलाने में सफलता हासिल नहीं की।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का प्रदर्शन कई बूथों पर बेहद खराब रहा। इसमें जो आंकड़े निर्वाचन की ओर से दिए गए हैं उसके अनुसार कई पोलिंग स्टेशन पर मौजूदा विधायक का बिल्कुल प्रभाव नहीं दिखा।