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उत्तराखंड लोकसभा चुनाव परिणाम 2019: भाजपा की जीत ने लिखा सियासी दिग्गजों का रिपोर्ट कार्ड

Fri, 24 May 2019 09:55 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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जनता का अभिवादन करते सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों के चुनावी नतीजों ने प्रदेश के सियासी दिग्गजों का रिपोर्ट कार्ड भी लिख डाला। भाजपा ने इस चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया। इस जीत से जहां मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कद बढ़ा है तो वहीं नैनीताल लोस सीट से चुनाव हारे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सियासी भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है। उन्हें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने शिकस्त दी। इस जीत से भट्ट का सियासी कद भी ऊंचा हुआ है।

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भट्ट के चुनाव में चले जाने के बाद पांचों सीटों पर भाजपा के प्रचार की कमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हाथों में थी। उनके राजकाज और राजनीतिक कौशल को चुनावी कसौटी पर माना जा रहा था। सियासी हलकों में ये चर्चा आम थी कि यदि पांच में से एक भी सीट भाजपा के कब्जे से निकली तो इसका ठीकरा मुख्यमंत्री के सिर पर ही फूटेगा। सियासी जानकारों की मानें तो पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर जहां भाजपा ने अपने वर्चस्व को बरकरार रखा तो वहीं मुख्यमंत्री चुनावों में अजेय बने रहने के रिकार्ड को भी बनाए रखने में कामयाब रहे। 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रदेश में थराली विधानसभा का उपचुनाव हुआ और उसके बाद शहरी निकायों के चुनाव हुए। इन दोनों ही चुनावों में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की प्रतिष्ठा दांव पर मानी गई। दोनों चुनावों में भाजपा ने जीत दर्ज की। लोकसभा चुनाव में भी उनकी प्रतिष्ठा को दांव पर माना जा रहा था। जानकारों की मानें तो पांचों सीटें जीतकर उनका सियासी कद बढ़ा है।

अजय भट्ट भी चमके

नैनीताल लोस से हरीश रावत सरीखे खांटी राजनीतिज्ञ को मात देने वाले अजय भट्ट का भी कद बढ़ा है। प्रदेश अध्यक्ष की सफल भूमिका निभाने के बाद पार्टी ने उन पर दांव लगाया था। चुनाव जीतकर उन्होंने पार्टी के फैसले को सही साबित किया। 

जीतने और जिताने का श्रेय तीरथ को
जनरल बीसी खंडूड़ी के राजनीतिक शिष्य तीरथ सिंह रावत ने गढ़वाल लोकसभा सीट पर शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने खंडूड़ी के बेटे को हराकर पार्टी के फैसले को सही साबित किया। हिमाचल में चारों सीटों पर भाजपा की जीत का श्रेय भी तीरथ के खाते में दर्ज हुआ है। वे वहां प्रदेश प्रभारी थे, चुनाव के दौरान उन्होंने वहां डेरा जमा रखा था।

डॉ. निशंक का भी बढ़ा कद
हरिद्वार लोकसभा सीट से चुनाव जीते डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक का भी कद बढ़ा है। वे लगातार दूसरा चुनाव जीते हैं। चुनाव शुरू होने से पहले उनकी सीट पर मुकाबला कड़ा माना जा रहा था। लेकिन हरीश रावत के नैनीताल लोस सीट पर जाने से उनकी चुनावी राह आसान मान ली गई थी।   

हरीश रावत के सियासी भविष्य पर सवाल

नैनीताल लोकसभा में मिली पराजय से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सियासी भविष्य पर सवाल लग गया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण से भी चुनाव हारे थे। इस तरह लगातार चुनावी पराजय के बाद उनका सियासी कद कम हुआ है। रावत हरिद्वार लोकसभा सीट छोड़कर नैनीताल से चुनाव लड़े थे। हालांकि पार्टी का प्रदेश नेतृत्व उनके नैनीताल से चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं था।  

पराजय से प्रीतम को भी झटका
टिहरी लोकसभा सीट पर कांग्रेस को प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह से काफी उम्मीदें थीं। पार्टी उनके सामने भाजपा प्रत्याशी माला राज्य लक्ष्मी को कमजोर प्रतिद्वंद्वी की तरह देख रही थी। लेकिन माला ने उन्हें पराजित कर जोर का झटका दिया। प्रीतम के सामने अब पराजय की हताशा से खुद को नहीं, बल्कि पूरी पार्टी को बाहर निकालने की चुनौती है।
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हार के बाद भी हाथ बटाऊंगा...

लोकसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। मेरी हार्दिक इच्छा थी कि मैं इस महान संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करूं। मैंने लक्ष्य निर्धारित किया था कि पहले से ही विकसित यहां की खेती को फूड प्रोसेसिंग और एग्रो एंड एलाइट सेक्टर बिजनेस हब के रूप में विकसित करूंगा। इस क्षेत्र की मैदानी व पहाड़ी खेती को कृषि उत्पादों के राष्ट्रीय मॉडल यहां तैयार कराऊंगा। होमस्टे का एक ऐसा पर्यटक मॉडल यहां तैयार करूंगा, जिसको सारे उत्तराखंड में आगे बढ़ाया जा सके। हर लक्ष्य प्राप्त हो, यह आवश्यक नहीं है, परंतु ऐसा संभव हो, इसकी कामना की जा सकती है। चुनावी पराजय के बावजूद मैं हमेशा इस क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की कामना करता रहूंगा। जहां संभव होगा, इस दिशा में हाथ बटाऊंगा।
-हरीश रावत, नैनीताल सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी

मैं भाजपा और उसके नेताओं को लोकसभा चुनाव में जीत के लिए बधाई देता हूं। जनता ने हमें विपक्ष में बैठने का आदेश दिया है, हम इसे शिरोधार्य करते हैं। जनहित के मुद्दों को हम लगातार उठाते रहेंगे। कोशिश होगी कि जनता का विश्वास हम फिर से जीत पाएं। पार्टी केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर हार की समीक्षा करेगी। हमारे हाथ में मजबूती से चुनाव लड़ना था, जीत हार का निर्णय देना जनता के हाथ में था। संगठनात्मक स्तर पर जिसको जो जिम्मेदारी दी गई, वो उसने पूरी की है। चुनाव में न सिर्फ उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश में जनता ने भाजपा के प्रति भरोसा जताया है, तो उसे खुले दिल से हमें स्वीकार करना होगा।
-प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
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