17वीं लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय दल और निर्दलीय प्रत्याशियों की जमानत भी नहीं बच पाई। एकमात्र क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल और माकपा, बसपा समेत निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव में अपनी छाप नहीं छोड़ पाए। पिछले दो लोकसभा चुनाव में उक्रांद का मत प्रतिशत गिरा है। इस बार प्रदेश की पांचों सीटों पर भाजपा ने रिकॉर्ड मतों से भगवा का परचम लहराया।
प्रदेश की टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, अल्मोड़ा और नैनीताल (ऊधमसिंह नगर) सीट पर भाजपा, कांग्रेस, अन्य दलों और निर्दलीय समेत कुल 52 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। लेकिन पांचों सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने रिकॉर्ड मतों के अंतर से ऐतिहासिक जीत हासिल की है।
जबकि क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय प्रत्याशी अपनी जमानत बचाने में भी कामयाब नहीं रहे। राज्य आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले एकमात्र क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल ने इस बार नैनीताल को छोड़कर बाकी चार सीटों पर चुनाव लड़ा। इस बार निर्वाचन आयोग ने उक्रांद को पार्टी का चिन्ह भी वापस कर दिया है। इसके बावजूद भी उक्रांद चुनाव में छाप नहीं छोड़ पाई है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में उक्रांद का पांचों सीटों पर 6.49 मत प्रतिशत रहा। वहीं 2014 के चुनाव में मात्र 1.49 मत ही मिले थे।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उक्रांद को 0.7 प्रतिशत मत मिले। राज्य आंदोलन से प्रदेश के लोगों की भावनाएं उक्रांद के साथ जुड़ी होने के बाद भी चुनाव में मतदाताओं का समर्थन नहीं मिला। इस बार सपा ने प्रदेश की किसी सीट पर चुनाव नहीं लड़ा। बसपा ने पौड़ी सीट को छोड़कर बाकी चारों सीटों पर चुनाव लड़ा। लेकिन हरिद्वार सीट के अलावा अन्य सीटों पर बसपा का प्रदर्शन खास नहीं रहा। क्षेत्रीय दल और निर्दलीय प्रत्याशियों को नोटा के बराबर भी मत नहीं मिले।