अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश के सिफारिशी पत्र से मामले ने तूल पकड़ लिया है कि बदरीनाथ के कपाट बंद होने के बावजूद उन्होंने जिलाधिकारी से सिफारिश क्यों की? सोशल मीडिया पर घिरने के बाद सरकार हरकत में आई। शासकीय प्रवक्ता ने मामले की जांच करवाने की बात कही।
यूपी के विधायक अमनमणि त्रिपाठी की गाड़ियों को बदरीनाथ और केदारनाथ जाने के लिए पास जारी करने का मामला बेहद गंभीर है। चूक किस स्तर से हुई है और क्यों हुई है इसकी पड़ताल की जा रही है। विधायक काफिले के साथ कर्णप्रयाग तक कैसे पहुंच गए, इसकी भी जांच होगी। जिस धाम के अभी कपाट तक नहीं खुले और केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार जिस धाम में अभी तक लोगों को दर्शन की इजाजत नहीं है। वहां के लिए यूपी विधायक समेत अन्य को पास जारी किया जाना गंभीर चूक है। सरकार ने इस पूरे प्रकरण का परीक्षण करवाने का
निर्णय लिया है। पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।
- मदन कौशिक, शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री
लॉकडाउन के दौरान किसी को आवाजाही के लिए वाहन पास मेरे स्तर से जारी नहीं होता है। उत्तर प्रदेश के विधायक की ओर से पत्र आया था। उसी के आधार पर जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया था।
- ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव
विधायक अमनमणि त्रिपाठी और उनके साथियों को बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की यात्रा के लिए पास जारी करने पर सरकार ने जांच बैठाई है। सरकार की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जांच कौन कर रहा है। चूंकि इस मामले में उच्च आईएएस अधिकारियों पर आरोप है, ऐसे में प्रकरण पर सबकी नजर टिकी है। माना जा रहा है कि सही से जांच होने पर आला अफसर नप सकते हैं।
विधायक अमनमणि को लॉकडाउन के दौरान पास जारी करने में गड़बड़ी उच्च स्तर से शुरू हुई। निचले अधिकारियों ने भी इस और ध्यान नहीं दिया कि पास जारी करने की वजह सही है या गलत। अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश की ओर से जारी पत्र को केंद्रीय गाइडलाइन से ऊपर मानकर सभी नियम कायदों को ताक पर रख दिया गया। इतनी बड़ी प्रशासनिक चूक पर जब सोशल मीडिया में फजीहत हुई तो प्रकरण की जांच करने की बात सामने आई।
शासन स्तर पर सभी अधिकारी इस प्रकरण में बयान देने से बचे। कोविड19 को लेकर सचिवालय के मीडिया सेंटर में होने वाली मीडिया ब्रीफिंग में मुख्य सचिव के नहीं आने पर पहुंचे अन्य अधिकारी इस मामले से संबंधित सवालों से बचते रहे। इन अधिकारियों ने मामले से अनभिज्ञता जता दी। उधर, सरकार की ओर से शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए जांच करवाने की बात कही, लेकिन किस स्तर से जांच हो रही है, इसकी जानकारी उन्होंने भी नहीं दी।
लीपापोती की आशंका जता रहा है विपक्ष
सरकार ने पूरे प्रकरण की जांच करवाने की बात कही है, लेकिन विपक्ष को आशंका है कि कहीं पूरे मामले में लीपापोती न हो जाए। विपक्ष का कहना है कि इस प्रकरण में उच्च अधिकारियों के स्तर से लापरवाही सामने आ रही है, ऐसे में सरकार को सीधे कार्रवाई करनी चाहिए। विपक्ष का सवाल है कि सरकार उच्च अधिकारियों पर कार्रवाई से बचते हुए जांच का बहाना तो नहीं बना रही।