किसी भी शिक्षक के जीवन में रिटायरमेंट का दिन एक अहम भूमिका रखता है। शिक्षक रिटायरमेंट को लेकर तरह-तरह के सपने सजोते है, लेकिन मंगलवार को रिटायर होने वाले हरिद्वार जनपद के बीस से अधिक शिक्षकों के सपनों पर पानी फिर गया। रिटायरमेंट के दिन न तो खुशी मना सके। वहीं न ही बच्चों को पढ़ाने का सुख मिल पाया ।
प्रत्येक वर्ष 31 मार्च को वित्तीय वर्ष समाप्त होता है। इन दिन ही शिक्षा विभाग की ओर से 60 साल की आयु पूरी कर चुके शिक्षकों को रिटायरमेंट किया जाता है। शिक्षकों के रिटायरमेंट को लेकर शिक्षकों के साथ-साथ स्कूल का
माहौल भी अलग ही हट कर होता है। इस दिन जहां शिक्षकों को अंतिम बार बच्चों को पढ़ाने का सुख मिलता है। वहीं बधाई देने वालों का ताता भी लगा रहता है, लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल उल्ट है। कोरोना के कारण पहले 31 मार्च तक लॉकडाउन किया गया था।
रिटायमेंट होने वाले शिक्षकों को उम्मीद थी कि एक अप्रैल को अपने मन ही चाही पूरी कर सकेंगे, लेकिन इससे पहले की सरकार की ओर से 14 मार्च तक के लिए लॉकडाउन कर दिया गया है। इससे 31 मार्च को रिटायर हो रहे शिक्षकों की गहरा झटका लगा है। सामान्यत: प्रत्येक वर्ष 20 से अधिक शिक्षक रिटायर होते है।
क्या कहती है मिथलेश
राजकीय प्राथमिक विद्यालय बहादरपुर सैनी में कार्यरत मिथलेश मंगलवार को रिटायर हुईं। शिक्षिक मिथलेश ने बताया कि उन्होंने अपनी जीवन में सोचा नहीं था कि ऐसा होगा। रिटायरमेंट का दिन किसी भी शिक्षक के लिए अहम दिन होता है, लेकिन इन दिनों देश जिस महामारी से लड़ रहा है। उससे निपटना हर व्यक्ति की प्राथमिकता है। वह भगवान से प्रार्थना करती है कि देश को जल्द से जल्द कोरोना के प्रकोप से बाहर निकाले।
मंगलवार को जो भी शिक्षक रिटायरमेंट हुए। हालत सामान्य होते ही रिटायर हुए शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। वहीं रिटायरमेंट के फंड आदि जारी कराने को लेकर संघ प्रयासरत है।
- मनमोहन शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष, उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक संघ
प्रत्येक वर्ष 31 मार्च को सामान्यत: करीब 20 से अधिक शिक्षक रिटायर हो जाते है। स्कूल खुले या न खुले। ये शिक्षक मंगलवार को रिटायरमेंट हुए है।
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ब्रहमपाल सिंह सैनी, जिला शिक्षाधिकारी बेसिक, हरिद्वार