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Lockdown in Uttarahand: लॉकडाउन के उल्लंघन में अब तक 10062 लोग गिरफ्तार, पढ़ें प्रदेश में एक महीने में क्या रहा खास...

Sun, 26 Apr 2020 04:42 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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uttarakhand lock down - फोटो : amar ujala
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लॉकडाउन का एक महीना उत्तराखंड के सभी जिलों में मिले-जुले असर वाला रहा। ज्यादातर जगह सड़कों पर सन्नाटा ही पसरा रहा। इस दौरान जहां कई जगह काफी सख्ती दिखी तो कई जगह लोगों ने नियमों की अनदेखी भी की। पुलिस ने भी ऐसे लोगों पर खूब सख्ती बरती। वहीं जरूरी चीजों की दुकानों पर सभी जगह भीड़ उमड़ी रही।

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कुछ जगह दुकानों पर गोल घेरे न बने होने और सोशल डिस्टेंस का पालन न होने पर पुलिस ने कार्रवाई भी की। इसके अलावा ओवर रेट वालों पर पुलिस की कार्रवाई का दौर भी जारी रहा। वहीं, फंसे और जरूरतमंद लोगों को सरकारी मदद तो मिलती ही रही साथ ही निजी संस्थाओं ने भी ऐसे लोगों की खूब मदद की। दोपहर एक बजे तक दुकानें खुलने में मिली राहत के बाद लोगों ने सोशल डिस्टेंस का पालन किया।

2189 मुकदमे दर्ज ,10062 लोग गिरफ्तार

उत्तराखंड में लॉकडाउन को लेकर पुलिस प्रदेश में चप्पे-चप्पे पर तैनात है। वहीं, कई जगह लोग लॉकडाउन का उल्लंघन करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। इसके चलते रविवार को प्रदेश में कुल 39 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। वहीं, 391 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था, अशोक कुमार ने बताया कि लॉकडाउन को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है। लेकिन लोग बेवजह सड़कों पर निकल रहे हैं। ऐसे में पुलिस विभाग ने प्रदेश में अब तक कुल 2189 मुकदमे दर्ज किए हैं। वहीं, 10062 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

उन्होंने बताया कि अब तक 25033 वाहनों का चालान भी किया है। इसके साथ ही 5296 वाहन सीज किए गए हैं। करीब एक करोड़ 24 लाख का शुल्क भी वसूला गया है।

संकट के दौर में भूख के आगे दीवार बनकर खड़ी हो गई संस्थाएं

प्रदेशभर में कई जगह संस्थाएं लोगों की भूख के सामने दीवार बनकर खुड़ी हुईं। धर्मनगरी हरिद्वार , देहरादून ही नहीं, नैनीताल, हल्द्वानी समेत कई जिलों में आध्यात्मिक और सामाजिक संस्थाएं आगे बढ़ीं और लोगों को सामान और खाना बांटा।

चंपावत में जिले में छह जगह राहत केंद्रों के जरिए फंसे लोगों को भोजन कराया जा रहा है। वहीं राजस्व विभाग ने दस हजार से अधिक राशन किटों का जरूरतमंदों को वितरण किया है। पिछले एक माह में अल्मोड़ा जिले में लॉक डाउन का सख्ती से पालन हुआ।

उधमसिंहनगर में प्रशासन की ओर से करीब पांच लाख भोजन के पैकेट वितरित हो चुके हैं और करीब 32 हज़ार राशन किट जरूरतमंदों को दी जा चुकी हैं। इसके अलावा जिले में शहर और ग्रामीण छेत्रों में कई सामाजिक संगठन और लोगों ने अपने स्तर से जरूरतमंदों को भोजन और राशन मुहैया कराया है।

बागेश्वर में लॉकडाउन के बाद पिछले एक महीने में जिले में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पूर्ति विभाग ने निशुल्क राशन वितरित किया। जिले के सभी पुलिस थानों के  भोजनालयों में जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया गया। पुलिस, रेडक्रास के साथ ही तमाम संगठनों ने राशन और भोजन वितरित किया। धारचूला में कई नेपाली मजदूर नदी पार कर नेपाल पहुंच गए।

मेयर तक पर दर्ज हुआ केस

रुड़की और देहात क्षेत्र में भी पुलिस की सख्ती रही।  रुड़की के मेयर गौरव गोयल समेत मंगलौर के पूर्व बसपा विधायक सरबत करीम अंसारी के खिलाफ लॉक डाउन का उल्लंघन करने पर केस होने का मामला भी सुर्खियों में रहा। दोनों ही मामलों में मेयर और पूर्व बसपा विधायक के विरोधियों ने सोशल मीडिया पर भी कटाक्ष किए।

इसके अलावा सबसे अधिक सुर्खियों में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के पिता का  देहांत होने पर उनके अंतिम दर्शन करने जा रही सहारनपुर में रहने वाली सीएम की मौसी को भगवानपुर पुलिस द्वारा बॉर्डर पर ही रोककर वापस कर देना रहा।

कहीं पुलिस ने शादी से पहले चुना वर्दी का फर्ज तो कहीं मास्क पहनकर लिए फेरे

इस एक महीने में होने वाली शादियां भी चर्चा में रहीं। चंपावत और टिहरी में मास्क पहनकर दुल्हा दुल्हन ने फेरे लिए। लॉकडाउन के चलते त्रिपुरा में तैनात असम राइफल के विजयराज परमार उत्तराखंड के चिन्यालीसौड़ में हुई अपनी बेटी अनामिका की शादी में शामिल नहीं हो पाए थे। उनकी अनुपस्थिति में छोटे भाई ने बेटी का कन्यादान किया। जबकि पिता ने वीडियो कॉलिंग के जरिए ही अपनी बेटी को विदाई दी।

यूपी के मिलक गांव से उत्तराखंड के रुद्रपुर बरात लेकर आ रहे दूल्हे को रामपुर रोड स्थित यूपी-उत्तराखंड बॉर्डर पर पुलिस ने रोक लिया था। जब पुलिस ने आगे जाने से मना कर दिया तो वधु पक्ष के लोग दुल्हन को बाइक से बॉर्डर पर लेकर पहुंचे। इसके बाद दोनों की शादी हो सकी। तो वहीं, बागेश्वर की डीएसपी ही नहीं, कई महिला पुलिसकर्मियों ने अपनी शादी स्थगित कर पहले ड्यूटी को चुना।
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किसी ने गुल्लक से दिए पैसे तो किसी ने दान कर दी जिंदगीभर की कमाई

उत्तराखंड के चमोली में गौचर की 60 वर्षीय देवकी भंडारी ने कोरोना से लड़ने के लिए अपनी जीवन भर की कमाई के दस लाख रुपये पीएम केयर्स फंड में दान कर दिए। उनकी इस पहल की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी सराहना की और शुभकामनाएं दी थी।

वहीं, सरकारी कर्मचारियों, डॉक्टरों ने भी सीएम राहत कोष में पैसे जमा किए। इतना ही नहीं कई जगह बच्चे भी इस पहल में सामने आए उन्होंने भी अपनी गुल्लक से पैसे दान किए।
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