प्रमोशन में आरक्षण समाप्त हो जाने के बाद से ही राज्य सरकार और सार्वजनिक निगमों में तैनात करीब सात हजार अफसर और कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया था, लेकिन सरकार ने कोर्ट के फैसला को तत्काल लागू नहीं किया।
इससे कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। 18 मार्च को कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने सभी विभागों को एक हफ्ते में सभी लंबित प्रमोशन करने के आदेश दिए, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण प्रमोशन फिर लटक गए। इस बीच उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लॉइज एसोसिएशन ने विभागों पर दबाव बनाया। इसका नतीजा यह है कि अब प्रमोशन की बयार चल पड़ी है।
लोनिवि में भी प्रमोशन की बयार
लोक निर्माण विभाग में अगले हफ्ते करीब 300 मिनिस्टीरियल कर्मचारियों का प्रमोशन तय हो जाएगा। प्रमुख अभियंता ने विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) का गठन कर दिया है। 27 अप्रैल को डीपीसी की बैठक के बाद 28 अप्रैल को पदोन्नति आदेश जारी हो जाएंगे। विभाग में ही चीफ इंजीनियर व सुपरिटेंड इंजीनियरों के भी प्रमोशन हो चुके हैं। शासन स्तर से इनके शासनादेश जारी हो गए हैं।
कृषि, उद्यान, सिंचाई व अन्य विभागों में भी शासन और विभागीय स्तर डीपीसी गठित करने के आदेश जारी हो रहे हैं। इन विभागों में भी सैकड़ों की संख्या में प्रमोशन लंबित हैं। विभागों से संबंधित एसोसिएशन के स्तर पर भी प्रमोशन को लेकर दबाव बनाने की कोशिशें हो रही हैं।
प्रमोशन पर फेडरेशन और एसोसिएशन में तकरार
प्रमोशन को लेकर उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लॉइज एसोसिएशन और उत्तराखंड एससी एसटी इंप्लॉइज फेडरेशन के बीच तकरार शुरू हो गई है। प्रमोशन में आरक्षण की पैरोकार फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष करम राम ने कोरोना संकट और लॉकडाउन के दौरान प्रमोशन को लेकर विभागों पर दबाव बनाए जाने की आलोचना की। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी ने उन्हें नसीहत दी कि वे प्रमोशन के बारे में कोई टिप्पणी न करें। क्योंकि, विभाग शासन के आदेश के अनुरूप ही प्रमोशन कर रहे हैं।